आदेश के चार माह बाद भी नहीं हुआ पालन
हाईकोर्ट ने पारित अपने आदेश में कहा है कि विगत एक एक नवंबर 21 को भी इसी कोर्ट ने सचिव राजस्व को निर्देश दिया था कि वह पूरे प्रदेश के जिलों में धारा 28 ए के अंतर्गत दाखिल हर जिले की अर्जियों का चार माह में निस्तारण कराएं। कोर्ट ने कहा कि उस आदेश में यह भी कहा गया था कि ऐसा न कर सकने पर सचिव राजस्व इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश पारित हुए चार माह से अधिक हो गया इसके बावजूद कोर्ट में याचिकाएं आ रही हैं और उसमें आरोप लगाया जा रहा है कि किसानों की धारा 28 ए के अंतर्गत दाखिल प्रार्थना पत्रों का निस्तारण नहीं हुआ है। कोर्ट ने इस मामले में 10 मई की तारीख नियत की है तथा सचिव राजस्व से उनका हलफनामा मांगा है और कहा है वह बताएं कि कोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद किसानों की अर्जियों का निस्तारण क्यों नहीं किया गया।
यह है प्रक्रिया
भूमि अधिग्रहण कानून 1894 में धारा 28 ए के तहत किसान अर्जी तब देता है जब एक ही अधिसूचना से बहुत सारी जमीनों का अधिग्रहण किया गया हो और कोर्ट ने उस अधिसूचना से संबंधित अन्य भूमि का मुआवजा बढ़ा कर देने का निर्देश दिया हो। कोर्ट के इस आदेश के बाद अन्य किसानों के लिए यह प्रावधान बना है कि वह धारा 28 ए भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी को अर्जी देकर अपनी भूमिका का बढ़ा हुआ मुआवजा प्राप्त करें।