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Allahabad High Court : काश्तकारों की अर्जियों का समय से निपटारा न होने पर हाईकोर्ट खफा

Sat, 23 Apr 2022 10:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने बुलंदशहर के राजवीर सिंह व कई अन्य किसानों की तरफ से दाखिल याचिका पर पारित किया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दाखिल काश्तकारों की अर्जियों का समय से निपटारा न होने पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने सचिव राजस्व से इस संबंध में 10 मई से पहले हलफनामा मांगा है और कहा है कि यदि उनका हलफनामा संतोषजनक नहीं पाया गया तो अदालत उनके खिलाफ  कोर्ट के आदेश की अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगी।

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यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने बुलंदशहर के राजवीर सिंह व कई अन्य किसानों की तरफ से दाखिल याचिका पर पारित किया है। याचिका में इन किसानों का कहना था कि दशकों पहले एक ही अधिसूचना से अधिग्रहीत उनकी जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा पाने के लिए उन लोगों ने विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी के समक्ष धारा 28 ए की अर्जी दी थी, परंतु आज तक उसका निस्तारण नहीं किया गया।


जबकि सरकार की तरफ से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 28 ए की अर्जी तभी दाखिल की जा सकती है, जब एक ही अधिसूचना से किसानों की भूमि प्रभावित हो। कहा गया कि याचीगण के मामले में उनकी अधिसूचना की तिथि व धारा 28 ए की अर्जी में लिखित अधिसूचना की तिथियों में अंतर है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को गुणदोष के आधार पर दाखिल अर्जियों का निस्तारण कर देना चाहिए न कि उसे लटकाए रखा जाए।

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आदेश के चार माह बाद भी नहीं हुआ पालन
हाईकोर्ट ने पारित अपने आदेश में कहा है कि विगत एक एक नवंबर 21 को भी इसी कोर्ट ने सचिव राजस्व को निर्देश दिया था कि वह पूरे प्रदेश के जिलों में धारा 28 ए के अंतर्गत दाखिल हर जिले की अर्जियों का चार माह में निस्तारण कराएं। कोर्ट ने कहा कि उस आदेश में यह भी कहा गया था कि ऐसा न कर सकने पर सचिव राजस्व इसके लिए जिम्मेदार होंगे।


हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश पारित हुए चार माह से अधिक हो गया इसके बावजूद कोर्ट में याचिकाएं आ रही हैं और उसमें आरोप लगाया जा रहा है कि किसानों की धारा 28 ए के अंतर्गत दाखिल प्रार्थना पत्रों का निस्तारण नहीं हुआ है। कोर्ट ने इस मामले में 10 मई की तारीख नियत की है तथा सचिव राजस्व से उनका हलफनामा मांगा है और कहा है वह बताएं कि कोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद किसानों की अर्जियों का निस्तारण क्यों नहीं किया गया।


यह है प्रक्रिया
भूमि अधिग्रहण कानून 1894 में धारा 28 ए के तहत किसान अर्जी तब देता है जब एक ही अधिसूचना से बहुत सारी जमीनों का अधिग्रहण किया गया हो और कोर्ट ने उस अधिसूचना से संबंधित अन्य भूमि का मुआवजा बढ़ा कर देने का निर्देश दिया हो। कोर्ट के इस आदेश के बाद अन्य किसानों के लिए यह प्रावधान बना है कि वह धारा 28 ए भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी को अर्जी देकर अपनी भूमिका का बढ़ा हुआ मुआवजा प्राप्त करें।
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