हाईकोर्ट ने रद्द किया अधिकारी का आदेश
कहा गया कि राज्य सरकार की अनुमति के बिना निदेशक, उर्दू ने पद की स्वीकृति दी थी। ऐसे में याची की सहायक अध्यापक तहतानिया के पद पर पूर्व में की गई नियुक्ति स्वीकृत पद पर नहीं थी, इसलिए वेतन जारी करने के आदेश को वापस लिया जाता है। इस आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि शासनादेश जारी कर उक्त पद की स्वीकृति दी गई थी।
कार्यकाल के दाैरान याची पर धोखाधड़ी या कदाचार का कोई आरोप नहीं है। 1995 से फरवरी 2024 तक राज्य के खजाने से याची को वेतन दिया गया। ऐसे में बिना किसी आरोप के पद से हटाना अवैध है। इस पर न्यायालय ने कहा कि याची पिछले करीब 30 वर्षों से कार्य कर रहा था। इस दौरान उसकी नियुक्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था। अधिकारी संतुष्ट थे कि उसकी नियुक्ति स्वीकृत पद पर है। इस मामले में याची की कोई गलती नहीं है। ऐसे में उसे वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता।