एसपी से कहा- अदालत से नहीं, जनता से माफी मांगिए
सुनवाई के दौरान देवरिया के एसपी ने अदालत से माफी मांगी। इस पर न्यायमूर्ति श्रीधरन ने कहा, "अदालत से माफी मत मांगिए, जनता से माफी मांगिए।" पीठ ने एसपी से यह भी पूछा कि सीसीटीवी व्यवस्था में लापरवाही के लिए एसएचओ के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। अदालत ने सवाल किया कि क्या एसएचओ को निलंबित किया गया या सेवा से बर्खास्त किया गया। न्यायमूर्ति श्रीधरन ने टिप्पणी की कि थाने का एसएचओ अगर जीडी में जांच तक नहीं कर सकता तो उसे सेवा में नहीं रहना चाहिए। अदालत ने यहां तक कहा कि ऐसा अधिकारी सिपाही बनने के भी योग्य नहीं है। एसपी ने बताया कि एसएचओ को अपराध शाखा भेज दिया गया है। हालांकि, अदालत इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुई।
10 दिन तक अवैध हिरासत में रखने का आरोप
मामला चार लोगों की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। आरोप है कि चारों को देवरिया के गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इनमें कुछ याचिकाकर्ताओं को करीब 10 दिन तक और अन्य को अलग-अलग अवधि तक हिरासत में रखे जाने का आरोप है। बताया गया कि कथित हिरासत का समय 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच का है। अदालत ने पहले थाने के अंदर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग पेश करने का आदेश दिया था, ताकि याचिका में लगाए गए आरोपों की सच्चाई की जांच की जा सके।
सीसीटीवी खराब था तो एसपी को जानकारी क्यों नहीं?
दो सितंबर को राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि कथित घटना से पहले थाने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग व्यवस्था में खराबी थी। इसके बाद अदालत ने देवरिया के एसपी और संबंधित एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। बुधवार की सुनवाई में अदालत ने एसपी से भी पूछा कि उन्हें थाने की सीसीटीवी व्यवस्था खराब होने की जानकारी क्यों नहीं दी गई। एसपी ने कहा कि उन्हें इसकी सूचना नहीं थी। अदालत ने पूछा कि यदि एसएचओ की गलती सामने आई थी तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पीठ ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी जताई।
46.46 लाख रुपये जारी करने पर भी अदालत नाराज
अदालत ने देवरिया जिले के थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए जारी की गई रकम को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत के सामने बताया गया कि सीसीटीवी व्यवस्था के लिए 46.46 लाख रुपये जारी किए गए थे। अदालत ने सवाल किया कि जब सीसीटीवी का काम पूरा नहीं हुआ था तो संबंधित एजेंसी को पूरी रकम क्यों जारी कर दी गई? पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एजेंसी को काली सूची में डालने के बजाय पूरी रकम जारी कर दी गई और केवल आश्वासन के आधार पर भुगतान कर दिया गया। अदालत ने अपने पहले के आदेश में भी इस बात पर सवाल उठाया था कि सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर अधिकारियों ने कार्रवाई तब शुरू की, जब मामला हाईकोर्ट पहुंच गया।
'याचिका के बाद ही कार्रवाई शुरू हुई'
दो सितंबर के आदेश में अदालत ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की थी कि जिला अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने और चार अगस्त के आदेश के बाद ही कार्रवाई शुरू की। अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि सीसीटीवी व्यवस्था के लिए जारी धनराशि की तारीख तक हलफनामे में स्पष्ट नहीं की गई। पीठ ने इसे महत्वपूर्ण और जरूरी जानकारी बताया था।
65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश
हाईकोर्ट ने चारों याचिकाकर्ताओं की कथित अवैध हिरासत को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता संख्या दो, तीन और चार को 20-20 हजार रुपये तथा याचिकाकर्ता संख्या एक को पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया। इस तरह कुल 65 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। खास बात यह है कि अदालत ने निर्देश दिया कि यह रकम संबंधित एसएचओ के वेतन से वसूल की जाए। आगे से खबर तैयार करते समय इसी पूरी तरह हिंदी लिपि वाले प्रारूप को प्राथमिकता दूंगा।
देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार याचिकाकर्ताओं को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को पुलिस अधिकारियों से कड़े सवाल किए। अदालत ने थाने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताते हुए व्यक्तिगत रूप से पेश हुए एसपी देवरिया और थाना प्रभारी एसएचओ से जवाब मांगा।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया गया है कि चारों याचिकाकर्ताओं को गौरी बाजार पुलिस स्टेशन में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। इनमें कुछ लोगों को करीब 10 दिन और कुछ को कम अवधि के लिए 13 से 24 अप्रैल 2026 के बीच हिरासत में रखे जाने का आरोप है। मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशन के अंदर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग पेश करने का निर्देश दिया था, ताकि याचिका में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा सके।
सीसीटीवी खराब होने के दावे पर सवाल
दो सितंबर की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि कथित घटना से पहले कुछ दिनों तक सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सिस्टम में खराबी थी। इसके बाद अदालत ने एसपी देवरिया और संबंधित एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। बुधवार की सुनवाई में अदालत ने एसएचओ से सीसीटीवी फुटेज गायब होने को लेकर कई सवाल किए। कोर्ट ने पूछा, "अगर कैमरा 14 अप्रैल से काम कर रहा था तो रिकॉर्डिंग कहां है? आप दो महीने तक एसएचओ रहे। रिकॉर्डिंग कहां है?"
एसएचओ ने अदालत को बताया कि सीसीटीवी सिस्टम में 12 अप्रैल 2026 को खराबी आ गई थी। अदालत ने यह भी पूछा कि सीसीटीवी की मरम्मत को लेकर जनरल डायरी (जीडी) में कोई प्रविष्टि की गई थी या नहीं। एसएचओ ने बताया कि ऐसी कोई जीडी एंट्री नहीं की गई थी।
एसपी को भी नहीं थी सीसीटीवी खराब होने की जानकारी
सुनवाई के दौरान एसपी देवरिया से भी सवाल किए गए। एसपी ने बताया कि उन्हें सीसीटीवी सिस्टम के काम नहीं करने की जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने पूछा कि सीसीटीवी में हुई लापरवाही के लिए एसएचओ के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।