पूर्णता प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करता है कि फ्लैट रहने लायक है या नहीं
कोर्ट ने कहा कि पूर्णता प्रमाणपत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन पूरी तरह तैयार और खरीदारों के रहने के लिए उपयुक्त है। सुनवाई में यह भी सामने आया कि प्राधिकरण की कार्यालयी नोटिंग में 29 मई 2006 के स्वीकृत भवन नक्शे को तीन जुलाई 2010 के आदेश से निरस्त किए जाने का उल्लेख है, लेकिन मूल रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश नहीं मिला। इससे भवन नक्शों को निरस्त और स्वीकृत करने की प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है। कोर्ट ने जीडीए उपाध्यक्ष को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर कब्जा दिए जाने और नक्शे के निरस्तीकरण की परिस्थितियों पर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। बिल्डर के अधिवक्ता को एफआईआर और कब्जा दिए जाने के संबंध में भी आदेश प्राप्त कर जानकारी देने के लिए कहा गया है। 10 सितंबर को सुनवाई होगी।