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इलाहाबाद हाईकोर्ट : करोड़ों की जीएसटी चोरी के आरोपी कमर आजमी की सशर्त जमानत मंजूर

Sat, 02 Mar 2024 01:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जीएसटी चोरी के आरोप में जेल में बंद मेरठ के कारोबारी कमर अहमद काजमी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने काजमी को सशर्त जेल से रिहा करने का आदेश दिया। मामला मेरठ के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है।
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कमर अहमद काजमी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी के आरोप में जेल में बंद मेरठ के व्यापारी कमर अहमद काजमी को सशर्त जमानत दे दी है । कोर्ट की शर्तो के मुताबिक रिहाई के लिए उसे अधीनस्थ न्यायालय में 25 लाख रुपए जमा करने होंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकल पीठ ने आरोपी की जमानत अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को सुनकर दिया।

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मामला मेरठ के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है। कमर अहमद काजमी के खिलाफ वर्ष 2023 में एसटीएफ इंचार्ज ने धोखाधड़ी करने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने सहित तमाम धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। उस पर चार करोड़ 28 लाख 37000 रूपये से अधिक टैक्स क्रेडिट लेकर उसका दुरुपयोग करने और 17 करोड़ 33 लाख रुपए से अधिक के ई वे बिल को बिना कोई कारण दिए निरस्त कर टैक्स चोरी करने का आरोप है ।

जांच एजेंसी का कहना है कि काजमी ने वर्ष 2017-18 से वर्ष 2022-23 तक के लिए चार करोड़ से अधिक की टैक्स क्रेडिट ली थी मगर इस दौरान माल का वास्तविक आवागमन न करके सिर्फ कागजों पर ही दिखाया गया। माल सप्लाई बहुत सी ऐसी फार्मो को की गई जो वास्तव में है ही नहीं। इसी प्रकार से ई वे बिल पोर्टल शुरू होने के बाद याची की फर्म द्वारा 17 करोड़ 33 लाख से अधिक के ई वे बिल निरस्त किए गए और इसका कोई कारण नहीं बताया गया।

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सत्यापन में खुली घपले की पोल

जिन फार्मो को सप्लाई की बात कही गई या जहां से माल खरीदने की बात कही जा रही थी उनके सत्यापन पर पता चला कि वह फार्म में कोई व्यवसाय ही नहीं कर रही है । जिन गाड़ियों या ट्रैकों से माल ढुलाई का जिक्र किया गया जांच में वह भी बताए गए रूट के किसी भी टोल प्लाजा पर उनका ब्यौरा नहीं मिला।

वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची एक पंजीकृत फर्म का प्रोपराइटर है जो कि जीएसटी में पंजीकृत है। और यह पंजीकरण आज की तारीख तक निरस्त नहीं हुआ है। सभी खरीदारी पंजीकृत फर्म से ही की गई। जिनकी की बाकायदा जीएसटी पोर्टल पर जांच की गई थी ।आवश्यक जीएसटी के साथ टैक्स इनवॉइस काटी गई। याची के खिलाफ इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर अब तक कोई आदेश नहीं हुआ है।
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फार्म के सर्वे में नहीं पाई गई आपत्तिजनक बात

वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था की जांच एजेंसी ने याची के फार्म के परिसर का सर्वे किया जिसमें कोई भी आपत्तिजनक बात नहीं पाई गई। वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि जीएसटी एक्ट अपने आप में संपूर्ण एक्ट है तथा सभी तरह की परिस्थितियों में कार्रवाई करने में सक्षम है। इसलिए आपराधिक कार्रवाई चलाने की आवश्यकता नहीं है।

जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल का कहना था कि यह आर्थिक अपराध का एक बेहतरीन उदाहरण है इसलिए इसमें आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है । याची ने फर्जी कंपनियों से माल खरीदा तथा सरकार को करोड़ों रुपए के टैक्स का नुकसान पहुंचाया है यह सिर्फ जीएसटी चोरी का मामला नहीं है बल्कि फर्जी दस्तावेज बनाकर फ्रॉड करने का भी मामला है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद याची कमर अहमद काजमी को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
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