सत्यापन में खुली घपले की पोल
जिन फार्मो को सप्लाई की बात कही गई या जहां से माल खरीदने की बात कही जा रही थी उनके सत्यापन पर पता चला कि वह फार्म में कोई व्यवसाय ही नहीं कर रही है । जिन गाड़ियों या ट्रैकों से माल ढुलाई का जिक्र किया गया जांच में वह भी बताए गए रूट के किसी भी टोल प्लाजा पर उनका ब्यौरा नहीं मिला।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची एक पंजीकृत फर्म का प्रोपराइटर है जो कि जीएसटी में पंजीकृत है। और यह पंजीकरण आज की तारीख तक निरस्त नहीं हुआ है। सभी खरीदारी पंजीकृत फर्म से ही की गई। जिनकी की बाकायदा जीएसटी पोर्टल पर जांच की गई थी ।आवश्यक जीएसटी के साथ टैक्स इनवॉइस काटी गई। याची के खिलाफ इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर अब तक कोई आदेश नहीं हुआ है।
फार्म के सर्वे में नहीं पाई गई आपत्तिजनक बात
वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था की जांच एजेंसी ने याची के फार्म के परिसर का सर्वे किया जिसमें कोई भी आपत्तिजनक बात नहीं पाई गई। वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि जीएसटी एक्ट अपने आप में संपूर्ण एक्ट है तथा सभी तरह की परिस्थितियों में कार्रवाई करने में सक्षम है। इसलिए आपराधिक कार्रवाई चलाने की आवश्यकता नहीं है।
जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल का कहना था कि यह आर्थिक अपराध का एक बेहतरीन उदाहरण है इसलिए इसमें आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है । याची ने फर्जी कंपनियों से माल खरीदा तथा सरकार को करोड़ों रुपए के टैक्स का नुकसान पहुंचाया है यह सिर्फ जीएसटी चोरी का मामला नहीं है बल्कि फर्जी दस्तावेज बनाकर फ्रॉड करने का भी मामला है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद याची कमर अहमद काजमी को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।