ग्रेच्युटी का भुगतान करने से कर दिया था इनकार
याची के पिता जगदंबा प्रसाद प्राथमिक विद्यालय निविया, राजेपुर फर्रुखाबाद में प्रधानाध्यापक के पद कार्यरत थे। सेवाकाल में उनकी मृत्यु हो गई। सेवा निवृत्ति परिलाभों का भुगतान किया गया किंतु यह कहते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान करने से इंकार कर दिया गया कि मृत्यु से पहले याची के पिता ने 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति का विकल्प नहीं दिया है। विकल्प न देने वाले अध्यापक 62 वर्ष की आयु तक कार्य करेंगे किंतु वे ग्रेच्युटी के हकदार नहीं होंगे।
कोर्ट ने कहा कि उषा रानी केस में कोर्ट ने विकल्प भरने से पहले मृत्यु पर अध्यापकों को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त मानते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि विकल्प देने से पहले मौत पर यह नहीं कह सकते कि वह 62 वर्ष का विकल्प ही देते।
कोर्ट ने याची की याचिका स्वीकार करते हुए दो माह में ग्रेच्युटी के भुगतान का आदेश दिया और देरी से भुगतान पर 8 प्रतिशत ब्याज देना होगा। आदेश का पालन नहीं किया गया तो अवमानना याचिका दायर की गई। पालन का मौका देने पर भी आदेश का अनुपालन नहीं किया तो कोर्ट ने अवमानना आरोप निर्मित कर दंड देने पर कारण बताने का आदेश दिया।