याचिका के अनुसार प्राचीन काल से ही मथुरा के शाहपुर गांव स्थित गाटा संख्या 1081 बांके बिहारी महाराज के नाम से दर्ज था। भोला खान पठान ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से 2004 में उक्त भूमि को कब्रिस्तान दर्ज करा लिया। जानकारी होने पर मंदिर ट्रस्ट ने आपत्ति दाखिल की। प्रकरण वक्फ बोर्ड तक गया और आठ सदस्यीय टीम ने जांच में पाया कि कब्रिस्तान गलत दर्ज किया गया है। इसके बावजूद जमीन पर बिहारी जी का नाम नहीं दर्ज किया गया। बल्कि, पुरानी आबादी दर्ज कर दिया गया। इस पर यह याचिका की गई है। कोर्ट ने एसडीएम को तलब किया था। एसडीएम, तहसीलदार व लेखपाल तीनों हाजिर हुए।
शुरू में जब सुनवाई हुई तो कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। कोर्ट ने वारंट जारी करने का आदेश दिया। थोड़ी देर में अधिकारी पहुंचे तो सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट से वारंट आदेश वापस लेने का अनुरोध किया। जिस पर याचिका की दोबारा सुनवाई हुई, जो देर शाम तक चली। कोर्ट ने पूर्व में पारित आदेश वापस लेते हुए अगली तारीख पर रिकॉर्ड के साथ मौजूद रहने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई पांच सितंबर को होगी।