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UP: 100 साल की उम्र में बाइज्जत बरी, 42 साल पुराने कत्ल के मामले में कोर्ट का फैसला; अदालत ने कही ये बात

Thu, 05 Feb 2026 11:02 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हमीरपुर में हुई हत्या के एक मामले में 100 साल का बुजुर्ग बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि जीवन की अंतिम बेला में सजा देना न्याय को निरर्थक बना देता है। हमीरपुर निवासी शख्स ने आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ अपील दायर की थी।
 
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Allahabad High Court - फोटो : एएनआई
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर हो तो दशकों की देरी के बाद उसे सजा देना न्याय को एक निरर्थक अनुष्ठान में बदलने जैसा है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने 42 साल पुराने हत्या के मामले में 100 साल की आयु पूरी कर चुके बुजुर्ग को बरी कर दिया। 
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यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि न्याय मानवीय परिस्थितियों से अलग कोई अमूर्त वस्तु नहीं है। कानून इस वास्तविकता को अनदेखा नहीं कर सकता कि बढ़ती उम्र अपने साथ शारीरिक कमजोरी और निर्भरता लाती है। 

सजा का उद्देश्य सुधार और समाज का हित होता है, लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा लंबित मुकदमे में बिता चुका हो तो सजा का व्यावहारिक और नैतिक बल समाप्त हो जाता है।
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कोर्ट ने यह भी माना कि दशकों तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह खुद में एक कठोर सजा बन जाती है। 40 वर्षों तक अनिश्चितता और सामाजिक कलंक का सामना करना अपने आप में एक दंड है।

यह मामला अगस्त 1982 का है। हमीरपुर निवासी धनी राम उर्फ धनइयां और सत्तीदीन को हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट ने 1984 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने अपील दायर कि थी और वे पिछले 40 वर्षों से जमानत पर थे। अपील के लंबित रहने के दौरान सत्तीदीन की मौत हो गई। वहीं, जीवित बचे धनीराम की उम्र वर्तमान में 100 वर्ष हो चुकी है।

 
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अदालत ने पाया कि न केवल अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा, बल्कि अभियुक्त की अत्यधिक उम्र और 42 साल का लंबा विलंब उसे पूरी तरह से दोषमुक्त करने के लिए अतिरिक्त आधार प्रदान करता है।
 
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