पहली बार यूपी में प्रचंड बहुमत से बनी भाजपा सरकार में इलाहाबाद की बल्ले-बल्ले हो गई है। योगी कैबिनेट में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ इलाहाबाद के दो विधायकों को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। शहर पश्चिमी से सिद्धार्थ नाथ सिंह और शहर दक्षिणी विधानसभा सीट से नंद गोपाल गुप्ता नंदी इसमें शामिल हैं। लखनऊ कैंट की विधायक डा. रीता बहुगुणा जोशी को भी जोड़ लिया जाए तो इस बार इलाहाबाद जिले से प्रदेश सरकार में तीन कैबिनेट मंत्री यहां का प्रतिनिधित्व करेंगे। रीता बहुगुणा जोशी का आवास इलाहाबाद में ही है।
कांग्रेस सरकार में हेमवती नंदन बहुगुणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका है कि जब प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में इलाहाबाद को इतनी तवज्जो दी गई है। यहां से एक डिप्टी सीएम और तीन कैबिनेट मंत्री सरकार में शामिल किए गए हैं। इसके पूर्व भाजपा की कल्याण सिंह की सरकार जो पूर्ण बहुमत से 1991 मेें बनी थी, तब सिर्फ डा. नरेंद्र सिंह गौर को ही कैबिनेट मंत्री बनाया गया था, जबकि शहर दक्षिणी के विधायक केशरी नाथ त्रिपाठी को विधानसभा का स्पीकर बनाया गया था। इसके बाद 1996 में हुए चुनाव के बाद एक बार फिर से डा. नरेंद्र कुमार सिंह गौर और हंडिया के विधायक राकेश धर त्रिपाठी मंत्री बनाए गए थे। वर्ष 2007 में आई बसपा सरकार में नंद गोपाल गुप्ता नंदी ही इलाहाबाद से मंत्री बन सके थे, जबकि 2012 में आई सपा सरकार में इलाहाबाद से आठ-आठ विधायक होने के बावजूद किसी को भी अखिलेश मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी थी।
अब इस बार योगी आदित्यनाथ की सरकार में केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम, सिद्धार्थ नाथ सिंह और नंद गोपाल गुप्ता को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इन सभी नेताओं से शहरियों को खासी उम्मीद है। लोगों का यही मानना है कि केशव, सिद्धार्थ, नंदी और रीता के योगी कैबिनेट में होने की वजह से विकास की राह में पिछड़े इलाहाबाद में अगले पांच साल के दौरान ढेरों विकास कार्य होंगे। दरअसल योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में इलाहाबाद ही एकमात्र ऐसा जिला है जिसके तीन बड़े नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली है, जबकि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से योगी सरकार में दो विधायकों को ही प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है।