इलाहाबाद। संगम की रेती पर कल्पवास करने आने वालों में तमाम ऐसे लोग भी हैं
जो नियमित रूप से भौतिक सुख-सुविधाओं के बीच रहते हैं। मगर आध्यात्म का
आकर्षण उन्हें भी रेती पर साधना के लिए खींच लाया है। कड़ाके की ठंड में
सुबह शाम गंगा स्नान, एक वक्त भोजन और जमीन पर पुआल पर बिछाकर सोने जैसे
महीने भर के कल्पवास का कठिन व्रत और अनुशासन को वह बखूबी निभा रहे हैं।
उनका यही कहना है कि महीने भर में गंगा मईया की गोद में रहने से बढ़कर सुख
भला और क्या हो सकता है।
काली मार्ग स्थित सामाजिक जन कल्याण समिति
के शिविर में नेहरू ग्रकाली मार्ग पार्टून पुल पास लगे जन सेवा संस्थान के
शिविर में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी की पत्नी और
संत कबीरनगर के सांसद शरद त्रिपाठी की मां अरुंधति त्रिपाठी कल्पवास कर रही
हैं। उनका कहना है कि महीने भर संगम की रेती पर रहने का आनंद भौतिक
सुविधाओं में रहने से बढ़कर है। गंगा किनारे हवन पूजन, रामायण पाठ मन को
बड़ी शांति देता है। वह पिछले आठ वर्षों से कल्पवास कर रही हैं। सभी स्नान
पर्वों पर पति रमापति त्रिपाठी आते हैं।
नेहरू ग्राम भारती
विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. कृष्ण बिहारी पांडेय कल्पवास कर रहे
हैं। उनके साथ पत्नी विनोदिनी पांडेय, छोटी बहन प्रेमा देवी और नातिन
अर्चना भी कल्पवास कर रही हैं। प्रो. पांडेय ने बताया कि जब वो लोक सेवा
आयोग के अध्यक्ष थे, तब से कल्पवास कर रहे हैं। विवि का काम प्रभावित न हो
इसके लिए हर रोज थोड़ा सा वक्त निकाल कर वहां जाते हैं। कहा कि गंगा किनारे
रहना उन्हें उनके बचपन के दिनों की याद दिलाता हैं। यहां आकर उन्हें बेहद
सुकून मिलता हैं।