देश-दुनिया के पर्यटकों -तीर्थयात्रियों के लिए अब अकबर का किला आने वाले समय में हमेशा के लिए खोल दिया जाएगा। सेना से किला खाली कराने के बाद प्रयागराज के पर्यटन को विश्व पटल पर विस्तार मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष से लोग किले में स्थित तीर्थों, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के दर्शन केसाथ ही जोधाबाई के महल, रंगशाला व अकबर की तोपों के अलावा अशोक स्तंभ को भी करीब से देख सकेंगे। केंद्र व प्रदेश सरकार की इस साझा पहल को प्रयागराज के पर्यटन विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होने के संकेत हैं। कुंभ से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एलान पर 450 साल बाद इस किले में स्थित मूल अक्षयवट और सरस्वती कूप को दर्शनार्थियों के लिए खोला जा सका था।
मुगलकालीन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने केतौर पर संगम तट पर स्थित अकबर केकिले को सेना से खाली कराने के बाद इसे पर्यटकों के खोलने की तैयारी है। किले को आम भक्तों व पर्यटकों के लिए खोलने की कोशिशें तो कई बार हुईं, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी। इस बार कुंभ से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन के जरिए इसे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों के लिए सुलभ कराने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा गया था। तब योगी सरकार केप्रस्ताव पर सेना के अफसरों का कहना था किले में आयुध भंडार होने की वजह से इसे सुरक्षा कारणों से खोलना उचित नहीं होगा।
उसी दौरान तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने भी किले का मुआयना कर सेना व प्रशासन के अफसरों केसाथ बैठक की थी। कहा जा रहा है कि इसके बाद से ही किले को खाली कराने पर मंथन शुरू कर दिया गया था। अब रक्षामंत्रालय के निर्देश पर किले को खाली कराने की योजना पर काम शुरू होते ही पर्यटन की नई संभावनाओं के पंख लग गए हैं। नाम न छापने के आग्रह पर अफसरों का कहना है कि किला खाली कराने का आदेश आने के साथ ही यहां पर्यटन की उच्चस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण को सौंपा जाएगा किला
सेना से खाली कराए जाने के बाद अकबर का किला प्रयागराज मेला प्राधिकरण को सौंपा जाएगा। आने वाले समय में इस किले का रखरखाव प्राधिकरण केजिम्मे होगा। प्राधिकरण ही किले में मूल अक्षयवट, सरस्वती कूप के अलावा भीतर स्थित 44 देवी-देवताओं के दर्शन-पूजन की व्यवस्था के साथ ही अन्य इंतजामों के लिए उत्तरदायी होगा। कुंभ के दौरान संगम क्षेत्र में हुई योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट मीटिंग में इस किले को प्रयागराज मेला प्राधिकरण को सौंपने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। तब सीएम ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि किले को आम दर्शनार्थियों के लिए हमेशा के लिए खोलने की अनुमति दी जाए, ताकि लोग आस्था के प्रतीक देवी, देवताओं के दर्शन-पूजन कर सकें।
उधर, आर्डिनेंस डिपो फोर्ट की किला मजदूर पंचायत ने आयुध भंडार से जुड़े कार्यालयों की शिफ्टिंग छिवकी की बजाए किले के बाहर की जमीनों पर कराने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। यूनियन के अध्यक्ष अहमद सैयद के नेतृत्व में शुक्रवार को कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल इलाहाबाद की सांसद रीता बहुगुणा जोशी से मिला।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सांसद को आयुध भंडार के स्थानांतरण संबंधी आदेश की जानकारी दी। साथ ही ज्ञापन देकर कहा कि किले से बाहर नंबर-2 भंडार क्षेत्र के नाम से कई कार्यालय संचालित हो रहे हैं। वहां पर पर्याप्त जगह है। ऐसे में आयुध भंडार को छोड़ किले के बाकी कार्यालयों को वहीं समायोजित करा दिया जाए। ओडी फोर्ट एवं 508 आर्मी बेस वर्कशॉप श्रमिक यूनियन के कर्मचारियों ने अपने विभागों का स्थानांतरण रोकने की बात सांसद के समक्ष प्रमुखता से उठाई। सांसद ने उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए पहल करने का भरोसा दिलाया है। प्रतिनिधिमंडल में महामंत्री संजय कुमार श्रीवास्तव, वीरेंद्र यादव, दीप नारायण सिंह, अनिल कुमार यादव, दीपक यादव, राजेंद्र निषाद, भीमराव, अनुज कुमार सिंह शामिल थे।