विहिप के हिंदू सम्मेलन में शनिवार को संरक्षक अशोक सिंहल ने यमुना किनारे बने अकबर के किले को गुलामी का प्रतीक कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया। कहा, मुगलों के काल में बने किले के बहाने हिन्दुओं के धार्मिक आस्था के केंद्र अक्षयवट को खत्म करने की साजिश की गई। इसे काटा, जलाया गया, फिरभी यह नष्ट नहीं हुआ तो किला बनाकर इसे घेर दिया गया। अब लोग असली अक्षयवट का दर्शन नहीं कर पाते। पातालपुरी बने नकली अक्षयवट का ही दर्शन कराया जाता है। यह जैन तीर्थंकर ऋषभदेव जी की तपस्थली भी रही। सिंहल ने किले को हटाकर रैन बसेरा बनाने की मांग की ताकि मेला में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को छत मिल सके। अक्षयवट के दर्शन और गुलामी के प्रतीक को हटाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी मुलाकात की गई थी, लेकिन यह संभव नहीं हो सका था।
सम्मेलन की तैयारियों के दौरान प्रचारित किया गया था कि गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ भी सम्मेलन में शामिल होंगे। उन्हें सुनने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। अशोक सिंहल और शंकराचार्य के पहुंचने के बाद युवकों की उत्सुकता, योगी को लेकर बढ़ी लेकिन उनके वहां न होने पर हूटिंग शुरू हो गई। युवकों ने शोर मचाना शुरू किया तो विहिप के प्रांतीय संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव ने समझाने की कोशिश की। युवक नहीं माने और उठकर जाने लगे। इससे थोड़ी देर के लिए सम्मेलन स्थल पर अफरातफरी जैसा माहौल दिखा। बसों और अन्य वाहनों से ग्रामीण क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष पहुंचे थे।
योगी समर्थक सम्मेलन स्थल छोड़कर जाने लगे तो बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि ने माइक से ललकारते हुए कहा, पीठ दिखाकर जाने वालों को अब लौटने की जरूरत नहीं है। किसी एक व्यक्ति की चाटुकारिता निंदनीय है। बड़े-बुजुर्गों के सामने युवक उद्दंडता दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं, आनंद गिरि ने जोड़ा, योगी के न होने का मतलब बुजुर्गों को पीठ दिखाकर जाना नहीं है। टेकना है तो देवताओं के सामने माथा टेको, नेताओं के चरणों में टेकना बंद करो। उनके बयान के बाद भीड़ में सन्नाटा पसर गया।
योगी आदित्यनाथ के न पहुंचने से भीड़ में निराशा का माहौल था। विहिप के काशी प्रांत संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव ने इसे भांपते हुए धर्मांतरण, घर वापसी, पूर्वोत्तर में ईसाई मिशनरियों के फैलाव, बीते दिनों नैनी में छात्रों की पिटाई, कश्मीर में आतंकवाद, आतंकवादी हमले, नक्सलवाद आदि मुद्दों पर जोशीला भाषण देकर भीड़ को बांधा। उन्होंने कैबिनेट मंत्री आजम खां को आईएसआई का एजेंट बताया। साथ ही विवादित बयानों से चर्चा में रहने वाले सांसद ओवैशी पर भी हमला बोला। स्वामी आनंद गिरि ने भी चेताया कि ओवैशी को संगम नगरी में घुसने नहीं देंगे।
बसपा के टिकट पर शहर उत्तरी से पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके हर्ष वाजपेयी भी हिन्दू सम्मेलन में पहुंचे। मंच से उनके नाम का ऐलान हुआ तो सम्मेलन स्थल पर खुसुर-पुसुर होने लगी। चर्चा हुई कि वह विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा का दामन थाम सकते हैं। कार्यक्रम स्थल पर वह अतिथियों के लिए लगी सीटों पर आरएसएस के प्रचारक मनोज के बगल बैठे हालांकि, मीडिया से दूरी बनाए रखी।