हवा खराब होने से दिल और सांस के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
हवा की गुणवत्ता खराब होने का असर दिल और सांस के मरीजों पर अधिक पड़ता है। ऐसे में उन्हें सुबह की सैर के दौरान मास्क लगाने की जरूरत है। इन मरीजों को हल्का व्यायाम करना चाहिए। सामान्य लोग भी मास्क लगाकर प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से कुछ हद तक बच सकते हैं। - डॉ. आरके यादव, पूर्व प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज
दिनभर उड़ती है धूल, आंखों और त्वचा तक पहुंचते हैं कण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भले ही बढ़े हुए एक्यूआई के पीछे दशहरे पर रावण दहन और आतिशबाजी को कारण बताया जा रहा हो, लेकिन प्रयागराज में रावण दहन की संख्या इतनी अधिक नहीं है कि प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में जगह-जगह चल रहे बेतरतीब निर्माण कार्यों के कारण भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।
सड़क और पुल निर्माण स्थलों पर बेतरतीब ढंग से खुदाई की जा रही है। इन स्थलों को न तो पर्दों से ढका गया है और न ही धूल उड़ने से रोकने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में दिनभर धूल के गुबार छाए रहते हैं। धूल के कण आंखों और त्वचा से टकराते हैं, जिससे सड़क पर चलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।