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आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर फिर उठे सवाल

Mon, 10 Sep 2018 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। आयोग अध्यक्ष के बारे में उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी नहीं दिए जाने पर विवाद बढ़ गया है। सूचना न देने पर राज्य सूचना आयुक्त ने सख्त निर्णय लेते हुए सूचना देने के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी है। सूचना न देने पर उच्च शिक्षा निदेशक पर 25-25 हजार रुपये के दो अर्थदंड लगाए जाएंगे।
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आयोग का अध्यक्ष बनने से पहले डॉ. अनिरुद्ध सिंह जीबी पंत कॉलेज, कछला बदायूं के प्राचार्य थे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने डॉ. अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्ष एवं उससे पहले प्राचार्य पद पर हुई नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे। अवनीश का आरोप था कि जीबी पंत कॉलेज में डॉ. अनिरुद्ध की नियुक्ति विज्ञापन संख्या 25 के तहत हुई थी जबकि इस विज्ञापन संख्या के तहत हुई भर्ती में कॉलेज की ओर से प्राचार्य पद का कोई अधियाचन ही नहीं भेजा गया था। वहीं, आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए डॉ. अनिरुद्ध ने जो आवेदन पत्र भरा था उसमें किसी भी मुकदमे का जिक्र नहीं किया। जबकि अवनीश का दावा है कि जीबी पंत कॉलेज के प्राचार्य पद को लेकर मुकदमा लंबित था। अवनीश ने यह आरोप भी लगाया है कि डॉ. अनिरुद्ध ने अध्यक्ष रहते हुए पीएचडी एवं विधि में स्नातक की डिग्री हासिल की और नियमों के विपरीत वेतन लेते रहे।

इसी के मद्देनजर अवनीश ने वर्ष 2016 में आयोग और प्रदेश सरकार के कार्मिक अनुभाग से जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी। हालांकि कहीं से भी उन्हें सूचना नहीं दी गई। अवनीश ने उन आवेदन पत्रों की प्रतियां मांगी है, जो डॉ. अनिरुद्ध ने प्राचार्य और अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए भरे। इसके अलावा प्राचार्य पद को लेकर हुए मुकदमों की सूचना मांगी है। साथ ही डॉ. अनिरुद्ध की पीएचडी और विधि स्नातक की डिग्री के बारे में जानकारी मांगी है। सूचना पाने के लिए अवनीश ने उच्च शिक्षा निदेशालय में दो अलग-अलग आवेदन दिए लेकिन सूचना नहीं मिल सकी। मामला अब राज्य सूचना आयुक्त तक पहुंच गया है। सात सितंबर को वहां सुनवाई थी। उच्च शिक्षा निदेशालय के प्रतिनिधि की ओर से कहा गया है कि जनसूचना अधिकारी के तहत आवेदन प्राप्त होने की जानकारी नहीं है। जल्द ही आवेदन को देखकर जवाब दिया जाएगा। फिलहाल मामले में सूचना आयुक्त अरविंद सिंह बिष्ट ने सुनवाई की अगली तिथि 30 नवंबर निर्धारित की है और कहा है कि सूचना न देने पर निदेशक/जनसूचना अधिकारी उच्च शिक्षा निदेशालय को 25-25 हजार रुपये के दो अर्थदंड देने होंगे।
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