अमिताभ की झलक पाने के लिए बेताब थीं महिलाएं
इसी वजह से राजीव गांधी ने अपने दोस्त अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद सीट से मैदान में उतार दिया। चूंकि अमिताभ सुपर स्टार होने की वजह से विदेशों में भी लोकप्रिय थे तो तमाम विदेशी मीडिया भी यहां पहुंच गई। अमिताभ तब खुली जीप से ही प्रचार को निकलते। उनकी एक झलक पाने के लिए युवतियों, महिलाओं में खूब होड़ मची रहती। 1984 में चुनाव में ईवीएम जैसी चीज नही थी। मतपत्र से ही चुनाव हुए थे। महिलाओं की दीवानगी इस हद तक बढ़ गई थी कि मतदान के दिन उन्होंने मतपत्र पर ठप्पा लगाने के बाद उसे चूमा भी।
हर बूथ पर चुनाव चिह्न पंजे पर मिल रही थी लिपस्टिक की छाप
इससे उनकी लिपिस्टक की छाप उसमें लग गई। वरिष्ठ समाजवादी केके श्रीवास्तव बताते हैं कि तब केपी कॉलेज में तकरीबन 20 घंटे मतगणना चली। तब तकरीबन हर बूथ पर महिलाओं द्वारा मतपत्र का चुंबन लिए जाने से कांग्रेस पार्टी के चुनाव चिह्न पंजा पर लिपिस्टक की छाप मिल रही थी। इसकी गिनती हुई तो 9736 बैलेट पेपर महिलाओं द्वारा लिए गए चूमे जाने से पंजा चुनाव चिह्न पर लिपिस्टक की छाप मिली। इसे रिटर्निंग अफसर ने अवैध घोषित कर दिया।
उस दौरान जया बच्चन ने संबंधित मत को निरस्त न करने का अनुरोध किया था। कहा था कि मतदाता ने स्पष्ट रूप से पंजे पर मुहर लगाई है, लेकिन अतिउत्साह में मतपत्र को चूमने में लिपिस्टक की छाप आ गई है। इन मतपत्रों को वैध किया जाए। रिटर्निंग अफसर ने उनकी आपत्ति को निरस्त करते हुए सभी मतपत्रों को अवैध घोषित किया। हालांकि वह चुनाव अमिताभ ने रिकार्ड मतों से जीता।