वहीं, तीन साल से प्रोत्साहन राशि की बाट जोह रहीं मंजू को 2023 में आंतरिक परेशानी महसूस हुई। 11 जुलाई 2023 को उन्होंने अस्पताल में दिखाया तो पता लगा कि वह फिर से मां बनने वाली हैं। यह सुन वह सन्न रह गईं। नसबंदी के बाद भी गर्भ ठहरने पर मंजू ने क्षतिपूर्ति का दावा किया। इस पर सीएचसी अधीक्षक ने 22 जुलाई 2023 को दावे के प्रपत्र सीएमओ प्रयागराज को कार्यवाही के लिए अग्रसारित कर दिया। लेकिन, उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
इसी दौरान 23 फरवरी 2024 को याची ने बेटी को जन्म दिया। बिटिया के जन्म के बाद दंपती पर तीन बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक तंगी से जूझ रही मां ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। कहा, अनचाहे गर्भ के लिए सरकारी डॉक्टर जिम्मेदार है। लिहाजा, मुआवजे देने के साथ ही सरकार बिटिया के लालन-पालन की जिम्मेदारी भी उठाए। कोर्ट ने सीएमओ प्रयागराज को मामले की जांच छह हफ्ते में पूरी कर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।