उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में प्रतापगढ़ के रामपुर खास से विधायक और आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप कर बड़ा सियासी दांव खेला है। इस राजनीतिक बदलाव के बीच सबसे खास पहलू उनका शैक्षिक बैकग्राउंड और महिला नेतृत्व के तौर पर उनकी उभार है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और एमबीए की डिग्री हासिल कर चुकीं आराधना मिश्रा की पहचान सूबे की पढ़ी-लिखी और मुखर महिला राजनेताओं में होती है।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि उनकी यह अकादमिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक समझ उन्हें अन्य नेताओं से अलग खड़ा करती है। कांग्रेस हाईकमान ने इस नियुक्ति के जरिए एक बार फिर उत्तर प्रदेश में महिला नेतृत्व पर बड़ा भरोसा जताया है। इससे पहले प्रो. रीता बहुगुणा जोशी भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल चुकी हैं, हालांकि पिछले कई वर्ष से वह भाजपा में है। फिलहाल कांग्रेस ने अब एक बार फिर पार्टी ने महिला चेहरे को आगे कर सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस की यह रणनीति बेहद सधी हुई मानी जा रही है। आराधना मिश्रा के जरिए पार्टी की नजर सूबे की आधी आबादी (महिलाओं) और ब्राह्मण मतों पर टिकी है। वह राज्यसभा सांसद और दिग्गज ब्राह्मण नेता प्रमोद तिवारी की पुत्री हैं। ऐसे में इस नियुक्ति से पार्टी सवर्ण खासकर ब्राह्मण मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश देने की जुगत में है।
सड़क से सदन तक संघर्ष का रहा है इतिहास
प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी और प्रवक्ता हसीब अहमद ने नेतृत्व के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आराधना मिश्रा ने हमेशा से प्रदेश में ब्राह्मणों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक जोरदार लड़ाई लड़ी है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उनकी यह आक्रामक शैली और सुशिक्षित छवि आगामी चुनावों में कांग्रेस को एक नई धार देगी। शीर्ष नेतृत्व के इस फैसले के बाद प्रयागराज समेत पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। बधाई देने वालों में शहर अध्यक्ष फुजैल हाशमी, विवेकानंद, हरिकेश त्रिपाठी, मनोज पासी, मो. हसीन, दीपचंद्र शर्मा, अरशद अली और शकील अहमद समेत कई प्रमुख लोग शामिल रहे। जल्द ही जिला और शहर कमेटियों के गठन की भी घोषणा होने की संभावना है।