रिटायरमेंट के बाद कोई प्रतिभाशाली कर्मचारी अब खाली नहीं बैठेगा। केंद्र सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद भी सेवा का मौका देने का निर्णय लिया है। इसके लिए सेवाकाल के दौरान उल्लेखनीय कार्य करने वाले कर्मचारियों से उनके विशेष योगदान के बारे में प्रस्ताव मांगे गए हैं। अगर प्रस्ताव मानक पर खरा उतरा तो रिटायरमेंट के बाद भी कर्मचारी को सेवा का मौका मिलेगा। साथ ही कर्मचारी की ओर से किए गए उल्लेखनीय कार्य की जानकारी को विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्रस्ताव रिटायरमेंट के छह माह पूर्व देना होगा। इस बाबत केंद्रीय पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग की ओर से सभी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
नई योजना को ‘अनुभव’ नाम दिया गया है। योजना के नाम ही स्पष्ट है कि सरकार राष्ट्र निर्माण में कर्मचारियों के अनुभव का लाभ उठाना चाहती है। पेंशनर्स कल्याण विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक कर्मचारी चाहें तो रिटायरमेंट से छह माह पहले पेंशन का फार्म-पांच भरने के साथ निर्धारित प्रारूप में अपने सेवाकाल काल के दौरान किए विशेष योगदान का उल्लेख भी कर सकते हैं। प्रस्ताव मानक के अनुरूप है या नहीं, यह कार्यालयाध्यक्ष तय करेंगे। फिर उनकी स्वीकृति के बाद प्रस्ताव विभागाध्यक्ष के पास भेज दिया जाएगा। ऐसे प्रस्तावों को विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा। अगर कर्मचारी की मंजूरी मिलेगी तो प्रस्ताव को ऐसी वेबसाइट पर भी अपलोड किया जा सकेगा, जिससे पूरी जानकारी सार्वजनिक की जा सके और अन्य लोग भी इसका फायदा उठा सकें। यह पूरी प्रक्रिया रिटायरमेंट के एक माह पहले पूरी कर ली जाएगी।
प्रस्ताव की प्रकृति क्या होगी, यह भी स्पष्ट कर दिया गया है। कर्मचारी अपने विशेष योगदान के बारे में उल्लेख करते वक्त यह ध्यान रखेंगे कि वह धार्मिक या राजनीतिक प्रकृति का न हो और राष्ट्रहित के विपरीत न हो। अगर सेवाकाल के दौरान किया गया विशेष योगदान टीम वर्क के रूप में है तो प्रस्ताव में टीम के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी देनी होगी। यह भी बताना होगा कि सरकारी क्रियाकलापों को दक्ष, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए कर्मचारी ने किस तरह से विशेष योगदान किया। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रस्ताव में कर्मचारी की ओर से दी जाने वाली प्रत्येक जानकारी के लिए वह खुद जिम्मेदार होगा। सिविल एकाउंट्स ब्रदरहुड के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि राष्ट्र निर्माण में वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय भगीदारी के लिए सरकार ने जो पहल की है, वह सराहनीय है।