अफगानों ने फर्रुखाबाद के निकट राम चौतनी नामक स्थान पर सफदरजंग को शिकस्त देकर प्रयाग नगर को घेर लिया। उस समय प्रयाग के दुर्ग रक्षक अल्प संख्या में होने के कारण नगर की रक्षा करने में असमर्थ साबित हो रहे थे। इससे जनता में हाहाकार मच गया। यह पता लगने पर राजेंद्र गिरि ने नागा संन्यासियों की विशाल वाहिनी लेकर अफगानों की घेराबंदी की और लोगों को उनके अत्याचार से मुक्त कराया।
इतिहासकार सर यदुनाथ सरकार ने राजेंद्र गिरि के शिष्य उमराव गिरि और अनूप गिरि के पराक्रम का जिक्र दशनाम नागा संन्यासियों का इतिहास नामक अपनी पुस्तक में किया है। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी बताते हैं कि नगर प्रवेश की परंपरा नागा संन्यासियों के शौर्य और पराक्रम से जुड़ी है। अफगानियों से प्रयाग की रक्षा के बाद नागाओं ने बाजेगाजे के साथ नगर प्रवेश किया था।