मीरगंज। दुनकी के कांवड़ियों का जत्था नौ वर्ष बाद रविवार को प्रशासन के सुझाए गए नए रूट से कछला घाट के लिए रवाना हुआ। इस दौरान कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की गई और भोलेनाथ के जयकारे लगाए।
अति संवेदनशील दुनका में वर्ष 2014 से पहले कांवड़ यात्रा और मुहर्रम के जुलूस मार्ग को लेकर दोनों समुदायों के लोगों में टकराव होता था। पुलिस प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई बार बैठकें कर दोनों आयोजनों के रूट अलग-अलग कर दिए थे। दुनकी और धनेली के कांवड़ियों के लिए दुनका के बाहर धनेटा-शीशगढ़ रोड से सुरेश चंद्र शर्मा के बाग के बराबर से निकले चक मार्ग से रास्ता दे दिया।
धनेली के कांवड़िये तो अधिकारियों की बात मानकर इसी रूट से ही कांवड़ निकालते रहे, लेकिन दुनकी के कांवड़ियों ने इस रूट से कांवड़ यात्रा निकालने से साफ इन्कार कर दिया था। उनका कहना था कि वो पीडब्ल्यूडी रोड पुराने रूट से ही कांवड़ यात्रा निकालेंगे, लेकिन प्रशासन ने वर्ष 2014 से ही कांवड़ यात्रा नहीं निकलने दी।
इस बार एडीएम प्रशासन, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, एसडीएम और सीओ मीरगंज ने गांव में तीन दौर की बैठकें कीं। इसका नतीजा यह रहा है कि ग्रामीण नए रूट से कांवड़ यात्रा निकालने पर सहमत हो गए। रविवार को 11 बजे महंत गुलजारी के नेतृत्व में रामपाल, छेदालाल, इंद्रपाल, आन्नदपुर, राजेश, महताब, ज्ञान सिंह, अरुण गंगाजल लेने के लिए कछला घाट रवाना हुए। इस अवसर पर वहां मौजूद एसडीएम उदित पवार, सीओ हर्ष मोदी और प्रभारी निरीक्षक शाही सत्येंद्र कुमार सिंह ने कांवडि़यों पर पुष्प वर्षा की। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें दुनका के आगे तक निकाला। नौ वर्ष बाद कांवड़िये दुनकी के शिव मंदिर पर जलाभिषेक करेंगे। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन की इस पहल प्रशंसा की है। वहीं, एसपी ग्रामीण राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि दुनकी के ग्रामीणों ने सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने प्रशासन का सहयोग किया है। पिछले कई वर्षों से जो गतिरोध चला आ रहा था, वह अब समाप्त हो गया है।