अन्य धार्मिक यात्राएं भी स्थगित रहेंगी। इन चार महीनों में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश समेत अन्य मंगल कार्य ठप रहेंगे। 23 नवंबर को देव उठनी एकादशी के साथ ही भगवान योग निद्रा से बाहर आएंगे। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक भगवान का शयनकाल पूरा होने के बाद ही शुभ कार्य आरंभ होगें।
चातुर्मास के दौरान आने वाले व्रत-त्योहार
चातुर्मास के दौरान दो सावन पड़ने की वजह से इस बार कई प्रमुख व्रत-त्योहार होंगे। सावन मेला, कांवड़ यात्रा, रक्षाबंधन, नागपंचमी, गणेशोत्सव, शारदीय नवरात्रि, कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी, कजली तीज, हरतालिका तीज, ऋषि पंचमी पड़ेगी।
23 नवंबर से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त
इस बार 23 नवंबर को देव उठनी एकादशी के साथ ही भगवान जागेंगे। सबसे पहले भगवान विष्णु के साथ तुलसी का विवाह होगा। इसी के साथ शहनाइयां बजने लगेंगी। 27 नवंबर को देव दीपावली के बाद लगातार विवाह के मुहूर्त हैं।