इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी को बड़ी राहत दी है। 47 साल चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला आया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के कल्पनातीत करार देते हुए याची को सेवा से संबंधित सारे लाभों का भुगतान करने का आदेश जारी किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से 79 वर्षीय रेलकर्मी को 47 साल की कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। कोर्ट ने रेलवे के सीनियर रक्षक की सेवा समाप्ति के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। साथ ही सेवा से संबंधित सभी लाभ देने का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने पांचू गोपाल घोष की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। मामले में पांचू गोपाल घोष रेलवे में सीनियर रक्षक की सेवा पर तैनात था। बिना विभागीय जांच के 1976 में उसे बर्खास्त कर दिया गया।
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इस मामले में हाईकोर्ट ने 2010 के आदेश से बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाते हुए विभागीय जांच कर नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया। जांच कमेटी ने 4 मई 2012 को रिपोर्ट दी और कहा कि मामला 35 साल पुराना है। ऐसे में आरोप साबित करने के लिए दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय अधिकारियों ने 1976 के बर्खास्तगी आदेश को साक्ष्य मानते हुए 5 जून 2012 को नए सिरे से बर्खास्त कर दिया। हाईकोर्ट ने इसे कल्पनातीत आदेश करार देते हुए रद्द कर दिया। सेवा जनित सभी लाभ का भुगतान तीन माह में करने का रेलवे विभाग को निर्देश दिया।