गौरतलब है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर 14 मार्च को लगी आग बुझाने के दौरान नोटो से भरी बोरियां मिलने के बाद न्यायिक क्षेत्र में बवाल मचा हुआ है। इसी बची सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को उनके पैतृक इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादले की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी। इससे खफा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आंदोलन की राह थाम ली है। सोमवार को लंच बाद न्यायिक कार्य से विरत रहने के फैसले के बाद आंदोलन बेमियादी कार्य बहिष्कार की ओर बढ़ गया है।
मंगलवार से तेज हुआ आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। फोटो आइडेंटिटी सेंटर पर ताले लटके रहे। वहीं, बार एसोसिएशन के सचिव विक्रांत पांडेय के नेतृत्व में हुई आमसभा में वकीलों ने न्यायिक भ्रष्टाचार व लिस्टिंग की समस्याओं के खिलाफ हुंकार भरी। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंह, आईके चतुर्वेदी, अधिवक्ता राय साहब यादव ने कहा कि हाईकोर्ट में लिस्टिंग की समस्या दिनों दिन विकराल हो रही है।
वादकारी फ्रेश केसों की सुनवाई न हो पाने के कारण बार-बार वकील बदल रहे है। अधिवक्ताओं को मुवक्किलों के असंतोष व गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सचिव विक्रांत पांडेय ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे न्यायमूर्ति को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने के सिफारिश बेहद चिंता जनक है। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश खरे, अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी, डॉ सीपी उपाध्याय, महेंद्र बहादुर सिंह, देवी प्रसाद सिंह, एसी तिवारी, संतोष मिश्रा, आशुतोष तिवारी, सच्चिदानंद यादव आदि मौजूद रहे।