बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश परिसर में रविवार को आयोजित आम सभा में सभी बार एसोसिएशन के अध्यक्षों और मंत्रियों ने एडवोकेट्स अमेंडमेंट बिल-2017 का तीव्र विरोध किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से घोषित आंदोलन के क्रम में सदस्यों ने 21 अप्रैल को न्यायिक कार्य से विरत रहने की घोषणा की।
उस दिन न्यायालय परिसर में बिल की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन की भी घोषणा की गई। साथ में डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। एक मई तक मांग नहीं माने जाने पर दो मई को दिल्ली में पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शित करते हुए राजघाट तक मार्च की घोषणा की गई। इसमें प्रत्येक राज्य बार काउंसिल, बार एसोसिएशन के सदस्य तथा अन्य अधिवक्ता शामिल होंगे। इस दौरान जिलों में मांग के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलेगा। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने बताया कि हस्ताक्षर अभियान की प्रति दो मई को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए अधिवक्ता 30 अप्रैल से तीन मई तक न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील की कि संबंधित जिलों के सांसद से मिलकर बिल पास न कराने का अपील करें। अनिल प्रताप ने बताया कि दो मई को भी बिल वापस नहीं लिया गया तो पूरे देश के अधिवक्ता रैलियां निकालने, जेल भरो आंदोलन, लॉ कमीशन तथा संसद को घेरने के लिए बाध्य होंगे। आम सभा में अवमानना कानून में संशोधन, ज्युडिशियल एकाउंटबिलिटी बिल लाने आदि की भी मांग की गई।
आज भी कार्य बहिष्कार
इलाहाबाद। भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाए जाने के विरोध में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सोमवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने की घोषणा की है। काउंसिल के अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने प्रदेश के सभी अधिवक्ता संघों और अधिवक्ताओं से अपील की है कि सोमवार को राष्ट्रव्यापी चर्चा कर कुलभूषण की फांसी का विरोध कर उन्हें भारत लाने का मार्ग प्रशस्त करें। कमिश्नर, जिला जज, डीएम को ज्ञापन सौंपने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि प्रभावी विरोध का संदेश देने के लिए अधिवक्ता सोमवार को न्यायिक कार्य से विरत भी रहेंगे।