वकीलों को पेंशन, भत्ते और कानूनी प्रावधानों में संशोधन की मांग को लेकर प्रदेश के तमाम जिलों के अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से तय किया है कि अधिवक्ता हितों की लड़ाई प्रांतीय स्तर पर लड़ी जाएगी। इसके लिए एक प्रांतीय संगठन गठित किया गया है। सभी जिलों के अधिवक्ता संगठनों के अध्यक्ष और मंत्री संगठन के संरक्षक सदस्य होंगे। उनकी अगुवाई में सभी जिलों में अलग-अलग महापंचायत होगी तथा दस जनवरी को संगठन अपने-अपने जिलों में नौ सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को डीएम के माध्यम से ज्ञापन देंगे। इस क्रम में 23 दिसंबर को लखनऊ में महापंचायत बुलाई गई है।
जिला अधिवक्ता संघ इलाहाबाद के तत्वावधान में आयोजित महापंचायत में बुधवार को सूबे के करीब 25 जिलों के अधिवक्ता संगठनों के पदाधिकारियों ने शिरकत की। फैजाबाद, सुल्तानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, कुंडा, हमीरपुर, कौशांबी, बदायूं, मऊ, बलिया, महोबा, चित्रकूट के अलावा हाईकोर्ट, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और दूसरे तमाम अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने महापंचायत में शिरकत की।
पहले से घोषित आठ सूत्रीय मांगों पर वक्ताओं ने चर्चा करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 41 में संशोधन का फायदा गलत लोग उठा रहे हैं। सात साल से कम की सजा वाले आपराधिक मामलों मेें अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं के संशोधन का दुरुपयोग हो रहा है। इसे संशोधन को निरस्त करना आवश्यक है। इसी प्रकार से सीपीसी की धारा 115 को निरीक्षणीय बनाना जरूरी है। अधिवक्ताओं के खिलाफ होने वाले अवमानना मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल गठित होना चाहिए।
सभी वक्ता जूनियर अधिवक्ताओं को कम से कम पांच साल तक स्टाइपेंड और वृद्ध वकीलों को पेंशन और बीमा राशि पांच लाख तक किए जाने की मांग के पुरजोर समर्थन में नजर आए। जिला न्यायालयों के अवकाश में कटौती वापस लेने और विधान परिषद् में वकीलों के लिए कम से कम 10 सीटें आरक्षित करने की मांग का समर्थन किया गया। आठ मांगों के अलावा बाहर के जिलों से आए अधिवक्ताओं ने अपने एजेंडे में एक और मांग जोड़ी। यह मांग थी अलग राजस्व कैडर गठित करने की थी। वकीलों का कहना था कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा राजस्व के मुकदमों की सुनवाई से निस्तारण में अधिक विलंब होता है। राजस्व मामलों के लिए अलग कैडर बनाया जाए।
महापंचायत की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष राकेश तिवारी ने की तथा मंत्री कोशलेश सिंह ने संचालन किया। पूर्व अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, राजेंद्र श्रीवास्तव, उमाशंकर तिवारी, सूबेदार सिंह, धारा सिंह, अजय शुक्ला, केबी सिंह, कुश पांडेय आदि ने अतिथियों को धन्यवाद दिया।
तमाम जिलों से जुटे अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों के पूरा नहीं होने का ठीकरा बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्यों के सिर फोड़ा। वक्ताओं का कहना था कि बार कौंसिल सदस्यों की नाकामी के कारण उनकी समस्याएं हल नहीं हो रही हैं क्योंकि सदस्य निजी स्वार्थ की पूर्ति में लगे रहते हैं, वकीलों की समस्याओं से उनको कोई सरोकार नहीं है। सभा में बार कौंसिल के सदस्य अमरेंद्र नाथ सिंह भी मौजूद थे।
बाहर के जिलों से कई अधिवक्ता प्रतिनिधि आगामी बार कौंसिल चुनाव में उम्मीदवार भी हैं। महापंचायत में हिस्सा लेने के साथ ही उन्होंने अधिवक्ताओं से मिलकर अपना प्रचार भी किया, हैंड बिल बांटे और आगामी चुनाव में वोट देने की अपील की।
महापंचायत में गोरखपुर से रामकृष्ण पांडेय, वेद प्रकाश दुबे, कौशांबी से मनुदेव त्रिपाठी, महोबा से राजकुमार द्विवेदी, रामप्रकाश, चित्रकूट से सुरेश द्विवेदी, राजेश सिंह चौहान, बांदा से मेदिनी कुमार बाजपेई, कुंडा से कमलाकांत मिश्र, फैजाबाद से संजीव दुबे, सूर्य नारायण सिंह, और लखनऊ जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के अलावा कैट बार के अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह, सेल्स टैक्स बार के मुन्ना यादव आदि मौजूद रहे।
जिला अधिवक्ता संघ ने महापंचायत आयोजित करने के लिए संघ के सभागार की जगह सड़क पर खुली जगह चुनी थी। जिला जज गेट के सामने सड़क पर ही पंडाल बनाकर सभा का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में वकीलों ने शिरकत की तथा सभा समाप्त होने तक वकील जमे रहे।
महापंचायत में तमाम जिलों से आए अतिथियों के अधिवक्ता संघ द्वारा खाने पीने और ठहरने का भी इंतजाम किया गया था। सभा की समाप्ति के बाद एक भोज का आयोजन किया गया।
1- सीआरपीसी की धारा 41 के संशोधन को रद्द किया जाए।
2- सीपीसी की धारा 115 में संशोधन किया जाए।
3- फर्जी रजिस्ट्री रद्द कराने में कोर्ट फीस न ली जाए।
4- वकीलों के खिलाफ अवमानना मामलों की सुनवाई हेतु ट्रिब्यूनल बने।
5- जूनियर वकीलों को पांच साल हर माह पांच हजार रुपये स्टाइपेंड
6- वृद्ध वकीलों को दस हजार रुपये पेंशन, पांच लाख का बीमा
7- जिला अदालतों की छुट्टियों में कटौती वापस ली जाए।
8- विधान परिषद् में दस सीटें अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित हों।
9- राजस्व मुकदमों की सुनवाई के लिए अलग कैडर बनाया जाए।