दूसरा यह कि अधिवक्ता को अपनी ड्रेस कोड में केवल न्यायिक उत्सवों और कार्यक्रमों में ही शामिल होना चाहिए। कभी बाजार, मार्केट, सामान खरीदने या अन्य जगहों पर ड्रेस कोड में या बैंड लगाकर नहीं जाना चाहिए। चाहे वे किसी बड़े नेता की रैली आदि क्यों न हो। कभी अधिवक्ता को क्लाइंट के साथ ड्रेस कोड में हाईकोर्ट के बाहर न तो भोजन करना चाहिए और न ही चाय पीनी चाहिए।
हाईकोर्ट में त्रिपाठी जी की शालीनता और उनका व्यवहार हमेशा अनुकरणीय रहा। उन्हीं से सीखने को मिला कि न्यायमूर्ति को अपनी बात शालीनता से और बुद्धिमता के साथ बतानी चाहिए। निर्णय अगर विपक्ष में जा रहा है तो न्याय का सम्मान करते हुए शालीनता का परिचय देना चाहिए। मेरा अपना अनुभव है कि वह अपने जीवन के अंतिम समय तक व्यक्तिगत रूप से समाज के लिए और विशेष रूप से अधिवक्ताओं एवं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लिए सहयोग करते रहे।
मेरे अध्यक्ष कार्यकाल में दो घटनाएं ऐसी हैं, जो त्रिपाठी जी इसी स्नेह और सहयोग का उदाहरण हैं। पहला यह कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इलाहाबाद हाईकोर्ट में आ रहे थे तो बार एसोसिएशन के लिए समय नहीं दिया गया।
मैंने अध्यक्ष के रूप में त्रिपाठी जी से, जो उस समय गवर्नर थे, अपनी समस्या बताई तो एक घंटे में पीएमओ से मेरे मोबाइल पर फोन आया और हमें प्रधानमंत्री से मिलने का समय मिल गया। प्रधानमंत्री ने हमारी बात सुनकर हाईकोर्ट में मल्टीस्टोरी पार्किंग एवं मल्टी स्टोरी एडवोकेट चैंबर्स के निर्माण का आश्वासन दिया, जो आज बन रहा है। दूसरा यह कि हमारा डेलीगेशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए जा रहा था। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद त्रिपाठी जी भी हमारे साथ चलने को तैयार हुए और मुख्यमंत्री से मिलकर डेलीगेशन की तरफ से बात रखी। मुख्यमंत्री ने हमारी समस्याओं को गौर से सुना और बाद में इसका समाधान भी हुआ।
उनसे अंतिम मुलाकात 15 अगस्त 2022 को हुई, जब हम लोगों ने त्रिपाठी जी से मिलकर उन्हें बार एसोसिएशन में बुलाया और उनकी वकालत के 50 वर्ष पूर्ण होने पर सम्मानित किया। वह हमारे बीच आए और वहां मौजूद अधिवक्ताओं एवं न्यायमूर्तियों के समक्ष कुछ ऐसी बातें रखीं, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उच्च न्यायालय के वातावरण को सुधारने के लिए उपयोगी हैं। पूरा बार एसोसिएशन और मैं स्वयं अध्यक्ष के रूप में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
चुनाव याचिका के महारथी थे पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी
जो चुनाव याचिका राजनारायण जी ने इंदिरा जी के खिलाफ की थी, उसमें पंडित केशरीनाथ त्रिपाठी ने भी बहस की थी, जिसने भारतीय राजनीति का रुख बदलकर रख दिया। एक अधिवक्ता के रूप में उनका संपूर्ण आचरण अनुकरणीय था और हम जैसे लोग उनकी बहस सुनकर आज अधिवक्ता के रूप में स्थापित हुए हैं। त्रिपाठी जी को चुनाव याचिका में महारथ हासिल थी। पिछले कई दशकों तक चुनाव याचिकाओं में किसी एक पक्ष की तरफ से बहस करते थे, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ उन्होंने कभी बहस नहीं की। -(लेखक: राधाकांत ओझा, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष)