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इलाहाबाद में अगड़ा बनाम पिछड़ा बनाने की कवायद

Sun, 21 Apr 2019 02:32 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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pandhari yadav - फोटो : प्रयागराज
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राजेंद्र प्रताप सिंह खरे को सपा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इलाहाबाद संसदीय सीट पर चुनाव अगड़ा बनाम पिछड़ा होता दिखाई दे रहा है। अभी कांग्रेस ने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है लेकिन सपा की ओर से जातीय समीकरण को साधने की कवायद शुरू हो गई है। महागठबंधन को बड़ा फैक्टर बनाने के लिए  युमनापार में बसपा के किसी बड़े नेता की सभा कराने की भी कोशिश शुरू हो गई है। ताकि, अनुसूचित जाति तथा आदिवासी मतों का भी पक्ष में ध्रुवीकरण किया जा सके।
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इलाहाबाद में अभी तक हुए सभी लोकसभा चुनाव में अगड़ी जाति के प्रत्याशियों ने ही बाजी मारी है। इसे ध्यान में रखकर भाजपा ने डॉ.रीता बहुगुणा जोशी को उतारा है। सपा की ओर से भी अगड़ी जाति के नेता को ही उम्मीदवार बनाने की चर्चा रही। इसमें सबसे ऊपर राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह तथा उनके पुत्र उज्ज्वल रमण सिंह का नाम चल रहा था।

इनके अलावा रईश शुक्ला, नरेंद्र सिंह आदि नेताओं का नाम भी चर्चा में रहा लेकिन पार्टी ने इस बार पिछड़ा कार्ड खेला है। इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में करीब तीन लाख पटेल मतदाता है। राजेंद्र प्रसाद को उतारकर पार्टी ने सीधे तौर पर इन्हें साधा है। इनके अलावा करीब दो लाख यादव हैं जो पार्टी के परंपरागत मतदाता हैं। अन्य पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या भी करीब दो लाख है। इनके अलावा करीब सवा दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं। सपा ने इस चुनाव को अगड़ा बनाम पिछड़ा बनाकर इन मतों को साधने की कोशिश की है। इसके अलावा अनुसूचित जाति के ढाई लाख तथा करीब 50 हजार कोल मतदाता हैं। महागठबंधन के सहारे इस वोट बैंक को जोड़ने की कवायद होगी।
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हालांकि, भाजपा प्रत्याशी डॉ.रीता बहुगुणा जोशी की भी यही मतदाता ताकत हैं। क्षेत्र में करीब साढ़े तीन लाख ब्राह्मण मतदाता हैं। पौने दो लाख वैश्य तथा एक लाख से अधिक अन्य सवर्ण मतदाता हैं। इनके अलावा डॉ.रीता की अन्य जातीयों में भी अच्छी दखल है। यमुनापार में उद्योग के विकास का श्रेय रीता के पिता हेमवती नंदन बहुगुणा को जाता है और क्षेत्र के लोगों का इस परिवार के साथ भावनात्मक लगाव है। रीता इन रिश्तों को लेकर भी चुनाव में हैं। ऐसे में सपा के लिए पिछड़ी एवं अनुसूचित जाति के मतदाताओं का ध्रुवीकरण आसान नहीं होगा और इलाहाबाद का चुनाव दिलचस्प होने जा रहा है।

इलाहाबाद सीट से कांग्रेस ने अभी तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। ऐसे में इलाहाबाद की तस्वीर पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुई है। कांग्रेस की तरकस से निकलने वाले तीर का इंतजार है। भाजपा के एक कद्दावर नेता का कांग्रेस में जाने की चर्चा है। यदि ऐसा हुआ तो वह कांग्रेस के उम्मीदवार भी होंगे। ऐसे में चुनाव काफी दिलचस्प होगा।

फूलपुर में सबसे अधिक साढ़े तीन लाख से अधिक पटेल मतदाता हैं। वहीं इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में भी करीब पौने तीन लाख पटेल वोटर हैं। ऐसे में राजेंद्र प्रताप सिंह पर इलाहाबाद के साथ फूलपुर में पटेल मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती होगी। इस कवायद के तहत वह राजेंद्र प्रताप सिंह पटेल भी हो गए हैं। इनके अलावा दोनों प्रत्याशियों को सांसद नागेंद्र सिंह पटेल, पूर्व सांसद धर्मराज पटेल को भी साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी होगी।

इलाहाबाद से सपा उम्मीदवार राजेंद्र प्रताप सिंह खरे के चुनाव में राज्य सभा सदस्य रेवती रमण सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। रेवती रमणी करछना से आठ बार विधायक रहे हैं। वर्तमान में उनके पुत्र उज्ज्वल रमण सिंह विधायक हैं। रेवती इलाहाबाद से दो बार सांसद भी रहे। ऐसे में रेवती के कद और क्षेत्र में पकड़ को देखते हुए भाजपा की रीता केखिलाफ उन्हें ही उतारे जाने की चर्चा रही लेकिन आखिरी दिनों में राजेंद्र प्रताप उम्मीदवारी तय हुई। हालांकि उन्हें या उनके पुत्र को टिकट न मिलने के बावजूद रेवती की चुनाव में बड़ी भूमिका होगी।
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