सोरांव के भोपतपुर गांव में राम किशोर की भूख से हुई मौत की घटना से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रभारी डीएम आंद्रे वामसी के निर्देश पर सोमवार सुबह सोरांव तहसील की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और दोपहर तक अपनी रिपोर्ट सौंप दी। राम किशोर की मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है। वहीं, कांग्रेसियों ने एडीएम प्रशासन को ज्ञापन देकर मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
‘अमर उजाला’ के आठ अगस्त के अंक में भूख से मौत की खबर प्रकाशित होने के बाद अफसरों की नींद टूटी। दिन में एसडीएम सोरांव बृजेंद्र कुमार द्विवेदी के नेतृत्व में तहसील की टीम ने मौके पर जांच की और राम किशोर के घर के एक हिस्से पर हुए अवैध कब्जे को खाली कराया। एसडीएम ने ग्राम पंचायत अधिकारी को मौके पर बुलाकर पीड़ित परिवार का राशन कार्ड बनाए जाने और राम किशोर की पत्नी बरन देवी को विधवा पेंशन दिलवाने का निर्देश दिया। हालांकि पीड़ित परिवार और गांव वालों में प्रशासन के प्रति गुस्सा था। उनका कहना था कि तीन दिनों तक घर में चूल्हा नहीं जला। परिवार के चारों सदस्य भूख से तड़पते और लड़ते रहे। भूख से जब राम किशोर की जान निकल गई तो प्रशासन ने राशन का बोरा घर में रखवा दिया। ऐसे में राशन का अब क्या फायदा।
कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
सोरांव के भोपतपुर गांव में राम किशोर की भूख से हुई मौत की घटना के मामले में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी और पार्टी नेता तारिक सईद अज्जू के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने एडीएम प्रशासन महेंद्र राय का ज्ञापन सौंपा। कांग्रेसियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि भूख से मौत पर प्रशासन पर ही उंगली उठ रही है और प्रशासन ही इस मामले की जांच कर रहा है। ऐसे में कैसे माना जाए कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी।
एक और मौत पर लीपापोती
सोरांव में भूख से मौत पर जिला प्रशासन ने लीपापोती शुरू कर दी है। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीड़ित परिवार को हर माह 30 किलो राशन मिल रहा था, जबकि परिवार का राशन कार्ड नहीं बना था। एसडीएम ने गांव के प्रधान के हवाले से यह बात कही है। वैसे भी परिवार में चार सदस्य थे। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रति सदस्य अधिकतम पांच किलो राशन मिलने का प्रावधान है। परिवार के पास अगर अंत्योदय कार्ड है तो 35 किलो राशन मिलना चाहिए। 30 किलो राशन किस हिसाब से मिल रहा था, यह सवाल जांच रिपोर्ट को भ्रामक साबित कर रहा है। अगर बिना कार्ड के राशन दिया जा रहा था तो यह भी किसी के गले उतर पाना मुश्किल है। लोगों को कार्ड पर राशन नहीं मिल रहा तो बिना कार्ड के राशन कैसे मिल सकता है।
बैंक खाता नहीं, फिर कैसी एफडी
एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि राम किशोर की नाबालिग बेटी निशा के नाम एक लाख की एफडी है लेकिन पीड़ित परिवार के किसी भी सदस्य का बैंक खाता ही नहीं है। ऐसे में एफडी कैसे हो सकती है। दरअसल, हकीकत यह है कि राम किशोर से जिस व्यक्ति ने जमीन खरीदी थी, उसने कहा था कि वह एक लाख रुपये नहीं देगा, बल्कि निशा के नाम एक लाख रुपये की एफडी करा देगा और बालिग होने पर पैसा उसे मिल जाएगा। राम किशोर की पत्नी बरन देवी ने बताया कि एफडी का उनके लिए कोई मतलब नहीं था। इस पैसे का कोई उपयोग नहीं था। एफडी के नाम पर राम किशोर को बरगलाया गया।
प्रशासन ने माना, बेच दी थी जमीन
प्रशासन का दावा है कि 65 वर्षीय राम किशोर की मौत अस्थमा की बीमारी से हुई लेकिन राम किशोर की पत्नी बरन देवी का कहना है कि उसके पति का इलाज संबंधी कोई पर्चा घर में नहीं है और न ही कहीं इलाज चल रहा था। मौत भूख से ही हुई है। प्रशासन ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह बात मानी है कि राम किशोर ने कुछ वर्षों पहले अपनी डेढ़ बीघा जमीन बेच दी थी, जिसकी एक किस्त मिल चुकी है और दूसरी मिलनी है।