इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर्स की प्रोन्नति हेतु चयन समिति की बैठक बुलाने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने कार्यवाहक कुलपति के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि कुलपति की गैरहाजिरी में कार्यवाहक कुलपति को चयन समिति की बैठक बुलाने और प्रोन्नति पर निर्णय लेने का अधिकार है। संस्कृत विभाग की डॉ. सुचित्रा मित्रा और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति वीके मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कार्यवाहक कुलपति को चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है ताकि प्रोन्नति के लंबित प्रकरण पर निर्णय लिया जा सके।
याचिका में कहा गया कि याची संस्कृत विभाग में सहायक प्रोफेसर है। यूजीसी की कैरियर एचीवमेंट स्कीम के तहत उनका प्रमोशन होना है मगर वर्तमान में नियमित कुलपति नहीं होने के कारण चयन समिति की बैठक नहीं हो पा रही है जिससे याची के प्रोन्नति में विलंब हो रहा है। मांग की गई कि कार्यवाहक कुलपति को चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया जाए।
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का कहना था कि कुलपति और प्रति कुलपति दोनोें के नहीं होने के कारण वरिष्ठतम प्रोफेसर को कार्यवाहक कुलपति का बनाया गया है इस वजह से बैठक नहीं बुलाई जा रही है। खंडपीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय की नियमावली के तहत कुलपति प्रधान कार्यकारी अधिकारी होता है। उसकी गैरमौजूदगी में उसके सभी काम प्रतिकुलपति करता है। दोनों के नहीं होने की स्थिति में कार्यवाहक कुलपति को उन सभी कार्यों को करने का अधिकार है जो नियमित कुलपति को है। पीठ ने चयन समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।