कोर्ट ने टकसाल में चोरी के आरोप को माना गंभीर मामला
वहीं, प्रतिवादी अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने दलील दी कि आपराधिक कार्यवाही व विभागीय जांच में सबूत अलग-अलग हैं। साथ दोनों कार्यवाही का उद्देश्य अलग-अलग है। इसलिए दोनों कार्यवाही एक साथ चल सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि याची पर भारत सरकार टकसाल से रुपयों की चोरी करने का आरोप है। ऐसे में गंभीर मामले के आरोपी को संस्था में काम करने देना संस्था के हितों के लिए सही नहीं होगा। टकसाल जैसे संवेदनशील संस्थान के हित में जांच को लंबित रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए विभागीय जांच को आदेश की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता को जांच की कार्यवाही में सहयोग करने का भी निर्देश दिया गया है।