जिला अदालत ने जालसाजी करते हुए बंधक बनाई गई संपत्ति का फर्जी कागजात बनाकर बेचने के मामले में एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को जमानत देने से इन्कार कर दिया। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश मृदुला मिश्रा ने साक्ष्यों का अवलोकन व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह बिसेन सिंह की दलीलों को सुनने के बाद दिया।
वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र के बजरडीहा निवासी शरद पांडेय पर प्रयागराज के सिविल लाइन थाने में एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक ने मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया था कि शरद पांडेय लोन रिकवरी एजेंट के रूप में कार्य कर रहा था। इस दौरान उसने फर्जी कागजात बनाकर बंधक बनाई गई संपत्ति बेच दी। उसने जमानत के लिए जिला न्यायालय में अर्जी दाखिल की।
आरोपी अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया था कि शरद पांडेय निर्दोष हैं। उनका बंधक बनाई गई संपत्ति से कोई सीधा संबंध नहीं है। न्यायाधीश ने पाया कि आरोपी पर लगाए गए अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। विवेचना के अनुसार प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट हो रही है। न्यायालय ने मामले की संपूर्ण प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया।