नए साल के जश्न के दौरान हुआ हमला
31 दिसंबर 2007 की रात में नए वर्ष के जश्न पर आतंकियों ने ग्रहण लगा दिया था। आतंकियों ने सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमला कर दिया था, जिसमें सात जवान शहीद हो गए थे। साथ ही एक-रिक्शा चालक की भी मौत हो गई थी। हमले की रिपोर्ट सिविल लाइंस कोतवाली के तत्कालीन दरोगा ओमप्रकाश शर्मा की ओर से दर्ज कराई गई थी। कोर्ट ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था।
विवेचना में पुलिस ने करीब दो सौ लोगों को गवाह बनाया था। जांच में यह सामने आया था कि लस्कर-ए-ताइबा के कमांडर सैफुल्ला ने पीओके में रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमला करने के लिए आतंकी प्रशिक्षित किए थे। उस समय सैफुल्ला भारत के मोस्ट वांटेड हाफिज सईद का खास बताया गया था। हमले में गिरफ्तार पाक आतंकियों के कबूलनामे के बाद सैफुल्ला का नाम भी सामने आया था।
खुफिया विभाग के सूत्रों की माने तो रामपुर हमले में सैफुल्ला का नाम सामने आने पर जांच एजेंसियों ने उसे पकड़ने के लिए कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान में होने की वजह से वह हाथ नहीं आ सका था। पुलिस ने दो सौ लोगों को गवाह बनाया था, लेकिन कोर्ट में कुल 55 गवाह पेश हो पाए थे। इनमें से 38 गवाहों की गवाही सिर्फ सीआरपीएफ कांड के संबंध में हुई 17 की गवाही आरोपी फहीम अरशद पर दर्ज एक अन्य मामले में हुई।
कोर्ट ने नवंबर 2019 में पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) निवासी मोहम्मद फारुख, मधुबनी बिहार निवासी सबाउद्दीन उर्फ सबा, पीओके निवासी इमरान शहजाद उर्फ अब्बू जर्रार कामरू, मुरादबाद के मूढ़ापांडे निवासी जंग बहादुर और रामपुर के खजुरिया क्षेत्र निवासी मोहम्मद शरीफ को सीआरपीएफ आतंकी हमले का दोषी करार दिया था। जबकि, बरेली के बहेड़ी निवासी गुलाब खां और प्रतापगढ़ के कुंडा निवासी कौसर खां को बरी कर दिया था।