इलाहाबाद हाईकोर्ट 1981 के गैर इरादतन हत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 43 साल बाद दो दोषियों को बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने बस्ती निवासी शिव कुमार और अन्य की याचिका पर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट 1981 के गैर इरादतन हत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 43 साल बाद दो दोषियों को बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने बस्ती निवासी शिव कुमार और अन्य की याचिका पर दिया।
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आरोपी शिव कुमार और बैठोले उर्फ राम तीरथ और अन्य के खिलाफ बस्ती के पैकोलिया थाने में हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। अभियोजन के अनुसार 24 जनवरी 1981 को खेत में काम कर रहे आत्मा प्रसाद पर आरोपियों ने फरसा, बल्लम और लाठी से हमला किया था। जिससे उनकी मौत हो गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने बैठोले को 10 साल और शिव कुमार को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य समान हों, तो बिना किसी ठोस और अलग आधार के केवल कुछ को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।