जिला अदालत में तमंचा रखने के मामले में 38 साल बाद आरोपी को बरी कर दिया गया। अदालत ने कहा कि आरोप तय होने के लगभग 22 साल बाद भी अभियोजन एक भी गवाह पेश नहीं कर सका।
जिला अदालत में तमंचा रखने के मामले में 38 साल बाद आरोपी को बरी कर दिया गया। अदालत ने कहा कि आरोप तय होने के लगभग 22 साल बाद भी अभियोजन एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। बरामद तमंचे के कार्यशील होने संबंधी फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) रिपोर्ट भी न्यायालय में दाखिल नहीं की गई। इसके बाद आरोपी को बरी कर दिया गया। यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योत्सनामणि यदुवंशी ने दिया।
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अतरसुइया के मीरापुर निवासी पुरुषोत्तम यादव उर्फ सल्टू के खिलाफ नैनी थाने में 1988 में आर्म्स अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। अभियोजन के अनुसार 17 अगस्त 1988 को गश्त के दौरान पुलिस ने पुरुषोत्तम यादव के पास से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद करने का दावा किया था। लाइसेंस न मिलने पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले में 11 अगस्त 2004 को आरोप तय किए गए। न्यायालय ने कहा कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद अभियोजन एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। इसके बाद अदालत ने आरोपी पुरुषोत्तम यादव उर्फ सल्टू को दोषमुक्त कर दिया।