इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहकारी बैंक में कार्यरत आंकिक को दो बार बर्खास्त करने के आदेश निरस्त करते हुए बकाया वेतन सहित तत्काल सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बिना आरोप पत्र, विभागीय जांच और सुनवाई का अवसर दिए बर्खास्तगी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने यह आदेश रोहित सिंह की याचिका पर दिया। याची सहकारी बैंक सहारनपुर में आंकिक के पद पर कार्यरत था। उसकी सेवाएं 23 मई और 13 जून 2026 के आदेशों से समाप्त कर दी गई थीं। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि बर्खास्तगी से पहले न तो आरोप पत्र दिया गया और न ही मौखिक जांच या सुनवाई का अवसर मिला। कोर्ट ने भी दोनों आदेशों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एक ही कर्मचारी की सेवाएं दो बार कैसे समाप्त की जा सकती हैं। संबंधित प्राधिकारी से जानकारी मांगे जाने पर स्वीकार किया गया कि न तो अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू हुई और न ही आरोप पत्र दिया गया। कोर्ट ने दोनों बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए याची को सेवा में निरंतरता, नियमानुसार बकाया वेतन और परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया।