यमुनापार स्थित करछना उपकेंद्र में मंगलवार की रात खंभे में चढ़कर बिजली मरम्मत करते समय करंट से झुलसकर नीतीश पटेल (28) की मौत हो गई। नीतीश के घरवालों का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही के चलते नीतीश की जान गई है। घटना के बाद बुधवार की सुबह उपकेंद्र में ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि बाद में पुलिस अधिकारियों ने मुआवजे का आश्वासन देकर हंगामा शांत कराया। मृतक की पत्नी कंचन की तहरीर पर उपखंड अधिकारी अश्विनी गुप्ता, अवर अभियंता सुशील यादव और मानवेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
भरहा गांव का रहने वाला नीतीश पटेल बिजली का काम जानता था। पत्नी कंचन की ओर से दी तहरीर के मुताबिक नीतीश को आए दिन उपकेंद्र से उपखंड अधिकारी व अवर अभियंता लाइन बनवाने और अन्य कार्यों के लिए बुलाते रहते थे। मंगलवार देर रात भी नीतीश के फोन पर मानवेंद्र प्रताप नाम के व्यक्ति का फोन आया। उसने उपकेंद्र की लाइन में आई खराबी ठीक करने को कहा।
नीतीश के मना करने के बावजूद वह व्यक्ति घर से उसे साथ लेकर गया। उसके बाद लाइन बनाते समय नीतीश करंट की चपेट में आ गया। वहां मौजूद लोग उसे एसआरएन अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने नीतीश को मृत घोषित कर दिया। पीड़ित परिवार के लोग जब अस्पताल पहुंचे, तो नीतीश की लाश वहां लावारिस हालत में पड़ी मिली।
इसके बाद शव को बिना पोस्टमार्टम के ही ग्रामीण व परिजन करछना उपकेंद्र लेकर गए और वहां जमकर हंगामा किया। हंगामा करने वालों का आरोप था कि उपकेंद्र पर नीतीश को गलत खंभे पर चढ़ा दिया गया। करीब दो घंटे बाद एसडीएम राजेश श्रीवास्तव और एसीपी संतोष सिंह समेत कई आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और पांच लाख रुपये किसान दुर्घटना बीमा व पांच लाख रुपये का मुआवजा बिजली विभाग की ओर से दिलाने का आश्वासन देकर हंगामा शांत कराया।
नीतीश विभाग का कर्मचारी नहीं था, न ही पूर्व में संविदा लाइनमैन था। मामले में जांच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशांत सिंह, अधीक्षण अभियंता (यमुनापार)