तूफान अर्नब के कारण जारी अलर्ट से किसान सहम गए हैं। धान की फसल खड़ी है, कटाई भी चल रही है। आलू की अगैती फसल भी बोई जा रही है। ऐसे में आंधी-पानी फसल बर्बाद कर देगा। किसान इस असमंजस में हैं कि फसल काटें या रोक दें। काटते हैं तो सुरक्षित कैसे रखेंगे। कटाई रोकने पर पूरी फसल चौपट होने का डर।
तेज तो नहीं, लेकिन बुधवार शाम से रुक-रुककर बारिश शुरू हो गई। बृहस्पतिवार को भी मौसम खराब रहा। फूलपुर के करुआडीह, बसनेहटा, बसना, जमुना, अमोलवा, देवली, वरुणा बाजार, बाबूगंज, भुलई का पूरा, उदईपुर, दीवानगंज, कोड़ापुर और मैलहन सहित कई गांवों में किसान धान की कटाई और फसल समेटने में लगे रहे। उन्हें आशंका है कि लगातार बारिश से धान भीगने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी और उपज का उचित दाम मिलने में परेशानी आएगी।
रूदापुर गांव के किसान अमित यादव, राम आसरे, अतरौरा गांव के राधेश्याम ने बताया कि बारिश से फसल खराब हुई तो कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा। इसी आशंका में वे जल्द से जल्द धान समेटने में जुटे हैं। मेजा और उरुवा में काटी गई फसल भीग गई।
हंडिया में जगदीशपुर के किसान मनोज यादव, रामनगर के अनिल तिवारी और गोंदौरा के नारायणधर दुबे ने बताया कि बारिश और तूफान से खड़ी और कटी धान की फसल का नुकसान होना ही है तो मौसम साफ होने तक कटाई का कार्य रोकना ही उचित है। बारा में किसान राम प्रवेश, भारत यादव आदि ने बताया कि कुछ जगहों पर फसल पक कर तैयार है। कटाई का कार्य भी चल रहा था, जिसे रोक दिया गया। करनाईपुर के किसान शंकर लाल पटेल, भाई लाल पटेल और राधेश्याम पटेल चिंतित हैं। उन्हें सालभर की मेहनत और लागत डूबने का डर सता रहा है।
अर्नब तूफान का असर अगले तीन दिनों तक रहने की आशंका है। तेज बारिश होने पर किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। फसल बचाने के साथ अपनी सुरक्षा का भी किसान ध्यान रखें। मौसम बेहद खराब होने और तेज बारिश के दौरान खेतों में जाने से बचें।
- मनीष अग्रहरि, सहायक विकास अधिकारी कृषि
रबी की बोआई पर भी संकट
मांडा/लेड़ियारी/बरौत। रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवा से पक कर तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है। खेतों और खलिहानों में काटकर रखी गई फसल के भीगने से उसमें फफूंदी लगने और दाने अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है। डेंगुरपुर के सुभाष तिवारी, महेवा कला के दिलीप सोनकर और रामधनी यादव ने बताया कि बारिश से धान की कटाई और मड़ाई प्रभावित हो रही है। खेतों में नमी बढ़ने से गेहूं, सरसों, चना और अरहर की आगामी बोआई में भी देरी हो सकती है। नवाबगंज। इलाके में बड़े पैमाने पर आलू तथा धान की खेती की जाती है। किसानों के मुताबिक बारिश हुई तो धान की खेती के साथ अगैती आलू की खेती को नुकसान होगा।
सोरांव -- अर्नब तूफान के चलते अपनी धान की फसल समेटने किसान
सोरांव -- अर्नब तूफान के चलते अपनी धान की फसल समेटने किसान
सोरांव -- अर्नब तूफान के चलते अपनी धान की फसल समेटने किसान
सोरांव -- अर्नब तूफान के चलते अपनी धान की फसल समेटने किसान
सोरांव -- अर्नब तूफान के चलते अपनी धान की फसल समेटने किसान