कोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों को अपनी पसंद से साथ रहने की स्वतंत्रता है। इसमें जाति, धर्म या गोत्र बाधा नहीं बनते। कोर्ट ने कहा कि किसी को भी दो वयस्कों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं हैं यहां तक की माता-पिता को भी नहीं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता पूर्ण नहीं होती। यह वहीं तक सीमित है, जहां से दूसरे व्यक्ति के वैधानिक अधिकार शुरू होते हैं।
कोर्ट ने कहा कि याचिओं के पास संरक्षण मांगने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। मैंडमस की रिट केवल तभी जारी की जा सकती है। जब याची के पास कोई वैधानिक और लागू करने योग्य अधिकार हो। कानून के विरुद्ध किसी कार्य को संरक्षण देने के लिए रिट जारी नहीं की जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने याचिओं को यह राहत दी कि किसी प्रकार का खतरा हो तो वे पुलिस अधीक्षक के समक्ष आवेदन देकर सुरक्षा मांग सकते हैं।