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एंद्र योग में पूर्णिमा, उदयातिथि में लगेगी डुबकी

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A full moon in Aandra Yoga, will dip in Udayatithi - फोटो : CITY DESK
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पौष पूर्णिमा पर ऐंद्र योग में संगम में लगेगी पुण्य की डुबकी
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आधी रात लगी पूर्णिमा, उदया तिथि में सूर्योदय से आरंभ होगा कल्पवासियों का स्नान-जप-तप और ध्यान
प्रयागराज। माघ मेले का पहला पौष पूर्णिमा स्नान शुक्रवार को ऐंद्र योग में होगा। पूर्णिमा बृहस्पतिवार की मध्यरात्रि के बाद ही आरंभ हो गई, लेकिन उदयातिथि में शुक्रवार की सुबह देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाएंगे।
रात1:55 बजे से शुरू हुई पूर्णिमा शुक्रवार की रात 1.02 बजे तक रहेगी। ऐसे में शुक्रवार की सुबह पुण्यकाल में स्नान, दान, व्रत, पूजन और कल्पवास आरंभ हो जाएगा। डॉ.देवी प्रसाद गौड़ प्राच्य विद्या अनुसंधान संस्थान के निदेशक और श्रीमद्भागवत के आचार्य अमिताभ महाराज के मुताबिक वैसे तो पूरे दिन स्नान किया जा सकता है लेकिन सूर्योदय के निकटस्थ समय सीमा में किया गया स्नान अधिक पुण्यदायी होगा। पूर्णिमा पर पूरे दिन ऐंद्र योग भी रहेगा, जिसमें डुबकी लगाने से सांसारिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है।कालिया कटार झंडा निशान वाले तीर्थपुरोहित विनय शर्मा के अनुसार मान्यता है कि माघ के महीने में संगम तट पर कल्पवास के दौरान किसी न किसी रूप में भगवान का दर्शन होता है। मान्यता है कि इस अवधि में 33 करोड़ देवी-देवताओं का भी यहीं वास होता है। यह देवी -देवता कल्पवासियों को किसी न किसी रूप में दर्शन देते हैं। इसलिए लोग घर और परिवार छोड़कर संगम की रेती पर महीने भर जप, तप, ध्यान में लीन रहते हैं।
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चंद्रग्रहण से पौष पूर्णिमा बेहद खास
प्रयागराज। इस बार चंद्रग्रहण लगने की वजह से माघ मेले की प्रथम डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए पौष पूर्णिमा खास हो गई है। पौष पूर्णिमा पर एंद्र योग में चंद्रग्रहण के स्नान का भी श्रद्धालु पुण्य बटोरेंगे। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक खंडग्रास चंद्रग्रहण शुक्रवार की रात 10:37 बजे लगेगा और रात 2:28 बजे मोक्ष होगा। इस दौरान अत्यंत धुंधला होने की वजह से ग्रहण प्रयागराज समेत देश के अन्य हिस्सों में कहीं दिखाई नहीं देगा। ऐसे में यहां सूतककाल व ग्रहण संबंधी मान्यताएं प्रभावी नहीं होंगी। लेकिन फिर भी, पौष पूर्णिमा पर कल्पवासी और संत-भक्त ग्रहण स्नान की भी डुबकी लगा सकेंगे।
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एक पहर भोजन, तीन पहर स्नान
कल्पवास किसी तपस्या से कम नहीं है। इसमें सिर्फ एक समय ही भोजन किया जाता है और स्नान तीन बार। कल्पवास के दौरान दान भी करना होता है। अन्न काला तिल, ऊन, वस्त्र व बर्तन आदि का लोग दान करेंगे। उस दिन आद्रा नक्षत्र में सूर्य रहेगा। इससे स्नान-दान का फल बढ़ जाएगा।
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