गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने से झूंसी के तटवर्ती और कछारी गांवों में संकट गहरा गया है। पिछले दो दिनों से करीब डेढ़ दर्जन गांव पानी से घिर गए हैं। ग्रामीणों की जिंदगी अब सड़क के बजाय नावों पर निर्भर हो गई है।
प्रशासन ने प्रभावित गांवों के लिए पांच नावें लगाई हैं। इन नावों से ग्रामीण अपनी साइकिल, मोटर साइकिल और दूध के बाल्टी लादकर आवागमन कर रहे हैं। टोंस नदी और पहाड़ों से आ रहे पानी के कारण गंगा-यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को भी जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई।
विज्ञापन
बदरा-सोनौटी मार्ग पर पानी डेढ़ से पांच फीट तक बढ़ गया है। बदरा, सोनौटी, ढोलबजवा, बहादुरपुर, गंजिया, हेतापट्टी, इब्राहिमपुर, खजुरी, फतेहपुर, एकलासपुर, मदारपुर, पैगंबरपुर, फैज्जुलापुर, सकरा, इब्राहिमपुर, शेरडीह, रहिमापुर समेत डेढ़ दर्जन से अधिक गांव जलमग्न हो गए हैं। सैकड़ों बीघे धान की फसल चौपट हो गई है।
बच्चे अभिभावकों संग नाव से जा रहे स्कूल
जलस्तर बढ़ने से बदरा-सोनौटी मार्ग बंद हो गया है, जिससे स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे जान जोखिम में डालकर अभिभावकों संग नाव से स्कूल पहुंच रहे हैं। सोनौटी गांव की कक्षा दो की छात्रा कल्पना सिंह और हाईस्कूल के राजेश कुमार भी नाव से आवागमन कर रहे हैं। ग्रामीण भी अपने दो पहिया वाहन और दूध के बाल्टी नावों पर लादकर यात्रा करने को मजबूर हैं।