इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कमेटी तो बना दी लेकिन इसका गठन खानापूरी तक ही सीमित रह गया। इस कमेटी की एक भी बैठक नहीं हुई और अब कोरोना संक्रमण के कारण यह बैठक अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। कार्यपरिषद की आगामी बैठक के एजेंडे में भी छात्रसंघ के मुद्दे को शामिल नहीं किया गया है।
पूर्व कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हंगलू के कार्यकाल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ को समाप्त कर छात्र परिषद के गठन का निर्णय लिया गया था। यह निर्णय पहले एकेडमिक काउंसिल और इसके बाद एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में हुआ था। हालांकि विश्वविद्यालय और संघटक महाविद्यालयों में भारी विरोध के कारण छात्र परिषद का गठन नहीं हो सका। केवल सीएमपी डिग्री कॉलेज में ही छात्र परिषद का गठन हुआ था। प्रोफेसर हंगलू के इलाहाबाद विश्वविद्यालय छोड़कर जाने के बाद छात्रों ने छात्रसंघ बहाली की मांग शुरू कर दी।
छात्रों की मांग को देखते हुए कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर आरआर तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाली होनी चाहिए और उसके बाद इस मुद्दे को प्रस्ताव के रूप में एकेडमिक काउंसिल की बैठक में रखा गया। 27 फरवरी को हुई इस बैठक में बहाली के मुद्दे पर सीधे तौर पर तो कोई निर्णय नहीं लिया गया लेकिन इसके लिए कमेटी का गठन कर दिया गया। तय हुआ कि कमेटी जल्द ही बैठक कर छात्रसंघ के स्वरूप पर चर्चा करेगी और इसके बाद कमेटी की रिपोर्ट एक अन्य वृहद कमेटी के समक्ष रखी जाएगी।
वृहद कमेटी छात्रसंघ के स्वरूप को अपनी मंजूरी देगी। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला कार्यपरिषद की बैठक में लाया जाएगा और वहां छात्रसंघ की बहाली पर अंतिम मुहर लगा दी जाएगी। फिलहाल छात्रसंघ बहाली के लिए बनी कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई। जब छात्रों ने कमेटी की बैठक तत्काल किए जाने की मांग शुरू की और इसके लिए आंदोलन हुआ तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि जल्द ही बैठक होगी, लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलने लगा।
विश्वविद्यालय में परीक्षाएं, बैठक, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस आदि सभी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए। उधर, विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की आगामी बैठक के लिए जो एजेंडा जारी किया गया, उसमें छात्रसंघ बहाली के मुद्दे को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में छात्रों को छात्रसंघ बहाली के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है