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सीबीएसई ने बच्चों को बोर होने से बचाने को दिए टिप्स

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स्कूल नहीं जाने और परीक्षा के बाद कहीं घूमने का अवसर नहीं मिलने से परेशान बच्चे अब बोर होने लगे हैं। लेकिन, लॉकडाउन के दौरान स्कूली बच्चों को बोर होने से बचाने केलिए सीबीएसई की ओर से कई अहम सुझाव दिए गए हैं। बोर्ड ने छात्र-छात्राओं से कहा है कि वे अपने घर को ही स्कूल समझें और घर को लर्निंग सेंटर के रूप में विकसित करें। अपनी दिनचर्या में घरेलू काम, खेल औ कम्युनिकेशन स्किल बढ़ाने की प्रक्रिया को शामिल करें। ऐसा करने से बच्चों को मजा आने लगेगा। लॉकडाउन के दौरान सभी को घर से निकलने पर पाबंदी है, स्कूल भी बंद हैं।
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सीबीएसई ने सुझाव दिया है कि घर में बोर होने से बचना है तो अपनी दिनचर्या को घंटों में बांट दें। बोर्ड की ओर से बच्चों को पांच से छह घंटे का रूटीन बनाकर दिया गया है। बोर्ड का कहना है कि इसे दिनचर्या में शामिल करने से बोर नहीं होंगे। इससे कैरियर के कई विकल्प भी खुलेंगे। बोर्ड ने सभी स्कूलों को इसे भेजा है, स्कूलों के माध्यम से इसे बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।
सीबीएसई ने भविष्य में बेहतर कैरियर मिलने के मकसद से कम्युनिकेशन स्किल अच्छा करने की सलाह दी है। इसके लिए कई कंपनी इनोवेटर्स, क्रिएटर्स, कम्युनिकेटर्स, थिंकर्स, लीडर्स और सोशल स्किल रखने वालों की तलाश की जा रही है। अगर विद्यार्थी इस समय का उपयोग कम्युनिकेशन स्किल बढ़ाने में करेंगे, तो आने वाले समय में यह कैरियर का अच्छा विकल्प साबित होगा।
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सीबीएसई ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने को कहा है। बोर्ड की ओर से ऑनलाइन म्युजिक, डांस, ड्रामा, वादन, गायन, भाषण, थियेटर, ड्रेस डिजाइनिंग, इंटीरियर डिजाइनिंग, ड्राइंग, पेंटिंग, रोबाटिक्स की कक्षाएं शुरू करने का सुझाव दिया गया है। बोर्ड ने रसोई में मम्मी का एक घंटे हाथ बंटाने की सलाह बच्चों को दी है। रसोई में खाना बनाना कला है। बच्चे कम से कम सब्जी, दाल, रोटी बनाना इस दौरान सीख लें।
नई कक्षा में प्रवेश की तैयारी में बच्चे अभी स्कूल और ट्यूशन से फ्री हैं, उनका पूरा दिन घर में बीत रहा है। समय का सदुपयोग करने केलिए वह एक से डेढ़ घंटा हाउसकीपिंग को दें। वह घर में सामानों के रख रखाव के साथ साफ-सफाई भी कर सकते हैं। घर के का में दीदी और भाई की मदद कर सकते हैं।
बोर्ड ने बच्चों से सुबह कम से कम 20 मिनट से लेकर आधा घंटे तक का समय योग, ध्यान, व्यायाम के लिए देने का निर्देश दिया है। इससे तनाव, गुस्सा, चिड़चिड़ापन कम होगा। इससे बच्चों के मन में नए-नए पॉजीटिव आइडियाज आएंगे।
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