इलाहाबाद (ब्यूरो)। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में एक साल की जगह दो वर्षीय बीएड और एमएड कोर्स तो शुरू ही होने जा रहे हैं, इनके अलावा कई इंटीग्रेटेड डिग्री और डिप्लोमा कोर्स भी शुरू होंगे। इसके तहत छात्र-छात्रा बारहवीं के बाद अब सीधे एमएड कर सकेंगे। यह कोर्स छह साल का होगा, जिसमें स्नातक और बीएड की पढ़ाई शामिल होगी। आगामी पांच वर्ष में इस तरह के तकरीबन एक दर्जन डिग्री और डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे। पूरे देश के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में शुरू होने वाले इन नए पाठ्यक्रमों को शुरू कराने में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए मॉडल कोर्स बनाने की जिम्मेदारी इविवि को दी गई है।
शिक्षा के गिरते स्तर से चिंतित मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीएड और एमएड की पढ़ाई में व्यापक फेरबदल का निर्णय लिया है। चंडीगढ़ तथा दिल्ली में कुलपतियों, एकेडमिक स्टॉफ कॉलेजों के निदेशकों और विशेषज्ञों की अलग-अलग बैठकोें में इस पर विस्तार से चर्चा हुई और वर्तमान में चल रहे कोर्स के प्रारूप में बदलाव के साथ नए पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया। चंडीगढ़ में हुई बैठक के कन्वेनर रहे इविवि शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रो. पीके साहू ने बताया कि बीएड और एमएड के कई इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू होंगे। बीएड की पढ़ाई में भी तीन बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा। इसके तहत विशेष कार्र्यक्रम चलाए जाएंगे। इसमें चार दिन छात्र-छात्राओं को निर्धारित विषय पर स्वयं अध्ययन करना होगा। इसके बाद 10 दिन की कार्यशाला होगी। फिर इन्हें प्रोजेक्ट कार्य करना होगा। कोर्स में कई अन्य बदलाव भी किए गए हैं। उन्हाेंने बताया कि इविवि समेत देश के 13 विश्वविद्यालयों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया गया है।