इलाहाबाद। बमरौली एयरपोर्ट पर बुधवार को रनवे से विमान के फिसलने और टायर फटने की घटना पहली नहीं है। इसके पहले भी रनवे से विमान फिसल चुका है। उस वक्त भी यात्रियों में इसे लेकर कोहराम मचा था। आशंका जताई जा रही है कि रनवे छोटा होने और घुमावदार वाले स्थान पर पायलट को कुछ दिक्कतें होती हैं। वायुसेना का एयरपोर्ट होने के कारण यहां सुरक्षा इंतजाम तो हैं लेकिन यात्रियों की सुविधा के कोई भी इंतजाम नहीं हैं। उधर, वायु सेना की सख्ती के कारण बमरौली एयरपोर्ट से विमानों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।
बमरौली एयरपोर्ट के संचालन का जिम्मा एयरफोर्स के पास है। एयर इंडिया समेत दूसरे विमानों के यहां उतरने और उड़ने के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा जिम्मा वायु सेना ही संभालती है। बताते हैं कि पिछले साल रनवे की लंबाई बढ़ाई गई लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। इसे और बढ़ाया जाना चाहिए। इसके न होने से रनवे से एयरपोर्ट की बिल्डिंग की तरफ विमान के आने के दौरान पायलट को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत पड़ती है। थोड़ी सी चूक विमान के पिछले पहिए को रनवे से नीचे कर देता है। पिछले साल हुई घटना भी इसी तरह हुई थी। तब, भी मोड़ पर पहिए कच्ची मिट्टी में गिरे थे। इसके विपरीत अफसरों का तर्क है कि इसमें सुरक्षा या रनवे के छोटा होने का कोई मुद्दा नहीं है। पायलट को रनवे पर चलना था लेकिन वह लैंडिंग के दौरान किनारे चला गया। इसके कारण वह विमान का संतुलन कायम नहीं रख सका।
फिलहाल, घटना के बाद दूसरे विमान को रात करीब आठ बजे उड़ाने के लिए एयरपोर्ट अथारिटी के अफसरों को वायु सेना अफसरों की मान-मनव्वल करनी पड़ी। काफी प्रयास के बाद वायु सेना ने इसे उड़ने की इजाजत दी। दरअसल, बमरौली एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट अथारिटी की ओर से नाइट लैंडिंग की सुविधा नहीं है। सो, दिन ढलने के बाद वायु सेना नागरिक विमानों को उड़ने की इजाजत नहीं देता। इसका असर यह पड़ रहा है कि निजी विमान कंपनियां इलाहाबाद से बैरंग लौट रही हैं।