इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में बैठकों का कोरम पूरा होने को लेकर संकट एक बार फिर खड़ा हो गया है। इसकी वजह से अर्से बाद शुरू शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। डॉ. परशुराम यादव के माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद आयोग में सिर्फ दो सदस्य रह गए हैं। जबकि कोरम पूरा करने के लिए कम से कम तीन सदस्य अनिवार्य हैं। ऐसे में नई नियुक्ति के बिना आयोग में फैसले ही नहीं हो पाएंगे।
इस समय आयोग में अध्यक्ष और चार सदस्यों की नियुक्ति है लेकिन अध्यक्ष डॉ. तजीम फातिमा और सदस्य डॉ. रामजनक यादव ने आदेश के महीनों बाद भी ज्वाइन नहीं किया है। दिल्ली के डॉ. रामजनक के ज्वाइन करने की उम्मीद भी कम है। ऐसे में आयोग में सिर्फ तीन सदस्य डॉ. रामवीर यादव (कार्यवाहक अध्यक्ष), डॉ. परशुराम पाल और डॉ. रामेंदु बाबू चतुर्वेदी रह गए थे। जबकि किसी भी बैठक का कोरम पूरा होने के लिए अध्यक्ष तथा दो सदस्य या तीन सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे में तीन सदस्यों के होने से आयोग में बैठक का कोरम पूरा हो जाता था। साथ में वर्षों बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के 1652 पदों के लिए शुरू भर्ती प्रक्रिया के संबंध में निर्णय भी हो जाता रहा लेकिन डॉ. परशुराम पाल के माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद बैठक के कोरम को लेकर फिर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में यदि जल्द से जल्द डॉॅ. फातिमा ने ज्वाइन नहीं किया या नए सदस्य की नियुक्ति नहीं हुई तो अनिर्णय की स्थिति में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के फंसने का भी खतरा है। हालांकि शासन ने इस स्थिति से जल्द निकलने का संकेत दिया है।