इलाहाबाद। इलाहाबाद कर्मचारियों का शहर कहलाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों को इस शहर में एक छोटे से घर का सपना देखना भी महंगा पड़ने लगा है। हर साल जमीन की कीमत में तेजी से इजाफा हो रहा है। पहली अगस्त से नया सर्किल रेट लागू होने जा रहा है, जिसके बाद जमीन की सरकारी कीमत में 10 से 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी और हो जाएगी जबकि कर्मचारियों को मिलने वाला भवन निर्माण एडवांस में पिछले चार वर्षोें से कोई इजाफा नहीं किया गया है। कर्मचारियों की मांग है कि जमीन की कीमत में वृद्धि न की जाए और भवन निर्माण अग्रिम की धनराशि में बढ़ोत्तरी की जाए।
शासन की ओर से 12 अक्तूबर 2010 को जारी आदेश के अनुसार भवन निर्माण/क्रय के लिए एडवांस के रूप में अधिकतम 34 माह का वेतन या साढ़े सात लाख रुपये अथवा भवन निर्माण या क्रय की लागत (इनमें से जो कम हो) का मूल्य दिए जाने का प्रावधान है। एडवांस के लिए कर्मचारियों को विभाग में आवेदन करना पड़ता है और उसके बाद विभाग की तरफ से ऋण के रूप में भवन क्रय या भवन निर्माण के लिए एडवांस उपलब्ध कराया जाता है। बता दें कि पहले सर्किल रेट प्रत्येक दो वर्ष में बढ़ता था लेकिन तीन साल पहले व्यवस्था बदल दी गई और सर्किल रेट का पुनरीक्षण हर साल होने लगा। पिछले साल ही सर्किल रेट में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी। अगले माह (अगस्त) की पहली तारीख से नया सर्किल रेट लागू होने जा रहा है और इसके लिए प्रस्तावित रेट की सूची तैयार कर ली गई है। सर्किल रेट में 10 से 20 फीसदी के इजाफे का प्रस्ताव रखा गया है। भवन निर्माण या क्रय की एडवांस रकम में 2010 के बाद कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई लेकिन जमीन की कीमत हर साल बढ़ रही है। कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि सर्किल रेट बढ़ने के कारण जमीन की कीमत में बढ़ोत्तरी के साथ रजिस्ट्री भी महंगी होती जा रही है जबकि भवन निर्माण या क्रम के लिए मिलने वाले एडवांस में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई। कर्मचारियों को राहत तभी मिलेगी, जब सर्किल रेट में वृद्धि रोकी जाएगी और भवन क्रम या निर्माण के लिए एडवांस की रकम में इजाफा किया जाएगा।