इलाहाबाद। दिल्ली कामनवेल्थ गेम्स में इलाहाबाद के खाते में भले ही कांस्य पदक आए हों, लेकिन इस बार ग्लास्गो में होने वाले कामनवेल्थ में गोल्ड मेडल की पूरी उम्मीद है। नेशनल रिकार्ड बनाने वाले इलाहाबाद के होनहार हैमर थ्रोअर चंद्रोदय नारायण सिंह का चयन कामनवेल्थ गेम्स के लिए किया गया है। खास बात यह है कि कामनवेल्थ में इस बार दूसरे तमाम मुल्कों से जो इंट्री आई है, उनमें ज्यादातर हैमर थ्रोअर 71 मीटर के आसपास ही अचीव कर सके हैं। जबकि चंद्रोदय का नेशनल रिकार्ड 71.12 मीटर है। चंद्रोदय नारायण सिंह लंबे समय तक इलाहाबाद एथलेटिक्स छात्रावास का हिस्सा रहे हैं। वह इस समय छात्रावास में तो नहीं है, लेकिन दिग्गज कोच मोहम्मद रुस्तम खान से ही प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं। चंद्रोदय नारायण सिंह इससे पहले 2010 में दिल्ली में आयोजित कामनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा ले चुके हैं, जिसमें उन्हें छठा स्थान मिला था। 2008 में पुणे में आयोजित यूथ कामनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल झटके। चंद्रोदय से इस बार गोल्ड मेडल की जो उम्मीद की जा रही है, उसकी एक बड़ी वजह यह है कि 22 जुलाई से ग्लास्गो में शुरू हो रहे कामनवेल्थ गेम्स में इस बार बड़े अचीवर नहीं हैं। दुनिया भर के जिन पांच हैमर थ्रोअर पर सभी की निगाह टिकी है, उनमें ज्यादातर 70-71 मीटर ही अचीव कर सके हैं। चूंकि चंद्रोदय ने इस बार 71:12 मीटर के साथ नेशनल रिकार्ड बनाया है, इसलिए भारत की दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है। कोच मोहम्मद रुस्तम खान को भी पूरी उम्मीद है कि चंद्रोदय के खाते में इस बार गोल्ड आना तय है। चंद्रोदय कहते हैं कि दिल्ली में आयोजित कामनवेल्थ गेम्स में जिस तरह का प्रदर्शन रहा, उसको ध्यान में रखते हुए वह अभ्यास में और ज्यादा समय दे रहे हैं।
कामनवेल्थ गेम्स में चयन के बाद खेल अधिकारियों ने भी चंद्रोदय नारायण सिंह की सराहना की है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार चंद्रोदय के जरिए भारत को इस बार गोल्ड मेडल मिलेगा। क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी अजय सेठी, अशोक कुमार, परवेज आलम, रंजीत यादव ने कोच मोहम्मद रुस्तम खान और चंद्रोदय को बधाई दी है। कामनवेल्थ में सालों से हिस्सा लेने के बाद भी भारत को हैमर थ्रो में गोल्ड नहीं मिला। चंद्रोदय दूसरी बार कामनवेल्थ में हिस्सा लेने जा रहे हैं। चूंकि इस बार उनका रिकार्ड बेहतर है और फिटेनस भी पूरी तरह साथ, इसलिए न सिर्फ इलाहाबाद, बल्कि पूरे भारत की नजर चंद्रोदय पर होगी। अगर ऐसा होता है तो चंद्रोदय गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय हैमर थ्रोअर होंगे।