आईएएस-2013 में हिन्दी पट्टी के अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन के पेपर में बड़ा झटका लगा है। संघ लोक सेवा आयोग ने आईएएस-2013 के कटऑफ और अभ्यर्थियों के प्राप्तांक जारी कर दिए हैं। यहां के प्रतियोगी सामान्य अध्ययन के एक-दो पेपर में 20 फीसदी भी अंक हासिल नहीं कर पाए। जबकि, विषय के प्रश्नपत्र में उन्हें चयनित अभ्यर्थियों से भी अधिक अंक मिले हैं।
मुख्य परीक्षा में 250-250 नंबर के निबंध, सामान्य अध्ययन के चार तथा तथा वैकल्पिक विषय के दो प्रश्नपत्रों की परीक्षा हुई। इस तरह से मुख्य परीक्षा 1750 नंबर (हिन्दी और अंग्रेजी को छोड़कर) की हुई, जिसमें सामान्य अध्ययन के एक हजार नंबर हैं। ओबीसी कैटेगरी के एक अभ्यर्थी को निबंध में 92 तथा विषय के दो प्रश्नपत्रों में 82 और 98 अंक मिले हैं। इसके विपरीत सामान्य अध्ययन में उन्हें 53, 44, 74 और 81 अंक मिले हैं। इस तरह से मुख्य परीक्षा में उन्हें कुल 524 अंक हासिल हुए हैं। जबकि, ओबीसी की मेरिट 534 गई है। इस तरह से मात्र 10 नंबर से वह मुख्य परीक्षा क्वालीफाई करने से चूक गए। सामान्य वर्ग के एक अभ्यर्थी को निबंध में 104 और विषय के दो पेपर में 204 अंक मिले हैं लेकिन सामान्य अध्ययन के चार पेपर में मात्र 248 अंक मिले हैं। इस तरह से उन्हें 556 अंक मिले हैं। जबकि कटऑफ 564 गया है। यह भी सामान्य अध्ययन में कम अंक पाने के कारण इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए। एएन झा का एक छात्र फाइनल सेलेक्शन में मात्र दो नंबर से पीछे रह गया। उन्हें 773 अंक मिले हैं। उनका पहले चयन हो चुका है। हॉस्टल के छात्रों का कहना है कि उन्हें भी सामान्य अध्ययन के पेपर में कम अंक मिले हैं। मुख्य परीक्षा या फाइनल रिजल्ट में सफलता से वंचित रह गए ज्यादातर अभ्यर्थी सामान्य अध्ययन में ही पीछे रह गए। मुख्य परीक्षा देने वाले रितेश यादव का कहना है कि सामान्य अध्ययन के पहले दो पेपर के सभी सवाल वह हल ही नहीं कर पाए। आलोक मिश्रा का कहना है कि स्किल और निर्णय क्षमता वाले पेपर में तो उन्हें अच्छे अंक मिले हैं लेकिन सामान्य अध्ययन के अन्य प्रश्नपत्र काफी खराब गए। आशीष मुखर्जी का कहना है कि वे कई सवाल को सही ढंग से समझ ही नहीं पाए। ब्रेन टूल्स के रनीश जैन का कहना है कि पहले सामान्य अध्ययन के पेपर में तीन हजार शब्द लिखने होते थे लेकिन अब यह सीमा तकरीबन पांच हजार हो र्गई है। इसलिए टाइम मैनेजमेंट बड़ी चुनौती है। इसके अलावा सवाल छोटे-छोटे खंड में बांट दिए गए हैं। इससे सेलेबस तो विस्तृत हो ही गया है, इसे हल करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण की भी जरूरत होगी। यहां के अभ्यर्थी इसमें पीछे रह गए।