इलाहाबाद। शहर के दर्जनों लोग मई के महीने में जब इराक के लिए रवाना हुए तो उनके अंदर करबला के शहीदों की दरगाहों की जियारत को लेकर उत्साह था। बुजुर्ग से लेकर महिला भी इस जत्थे में शामिल थीं। जियारत के बाद कुछ लोग वापसी की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही इराक के हालात बिगड़ गए। जो जहां थे, वहीं रुक गए। इराक के हालात बिगड़ने के बाद दरियाबाद, दायरा शाह अजमल, करेली में रह रहे उनके रिश्तेदारों, पड़ोसी और दोस्तों की बेचैनी बढ़ गई। वे फोन कर अपनों की पल-पल की खैरियत ले रहे हैं। इराक में फंसे सभी लोग सलामत रहें, इसके लिए मसजिदों और दरगाहों में भी दुआएं की जा रही हैं।
दरियाबाद के मजाहिर अब्बास तालीम हासिल करने के लिए 2004 में इराक रवाना हुए थे। इराक के करबला शहर में आलिम की डिग्री हासिल करने के बाद मजाहिर वतन वापसी की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही हालात बिगड़ गए। अम्मी जरीन फातिमा के मुताबिक इराक के हालात बिगड़ने के बाद मजाहिर वापसी के लिए मौका तलाश रहे हैं। हर रोज फोन कर उनकी खैरियत ली जा रही है। हालांकि जंग की आंच अभी तक करबला नहीं पहुंची, लेकिन जिस तरह टीवी पर तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं।
दायरा शाह अजमल के सामिन अब्बास भी अपनी अम्मी की सुरक्षा के लिए बेचैन हैं। 14 जून को जियारत के लिए इराक रवाना हुई सबदरी बेगम ने फोन पर बताया कि फिलहाल वह खैरियत से हैं। बगदाद और करबला में इराकी सेना पूरी तरह मुस्तैद है और उन्होंने जरा भी न घबराने का आश्वासन दिया है। इसलिए वह इमाम हुसैन, हजरत अब्बास आदि की दरगाहों की जियारत करने की फिराक में हैं। सामिन कहते हैं कि उनकी अम्मी अकेले इराक गई हैं, इसलिए फिक्र लाजमी है। हालांकि उन्हें समझा दिया गया है कि करबला के हालात बिगड़े, इससे पहले ही वह वतन लौट आएं।
मदरसा अनवारुल उलूम उपप्रधानाचार्य मौलाना रजी हैदर, करेली के हुस्नुल हसन भी जत्थे के साथ इराक में हैं। मौलाना रजी हैदर के रिश्तेदार जवादुल हैदर जूदी के मुताबिक फोन पर इराक की पल-पल की जानकारी ली जा रही हैं। जत्थे के कुछ लोग वापसी के लिए मौके की तलाश में हैं।
शहरियों की वापसी को हुई दुआ
इराक में फंसे शहरियों के साथ ही 40 भारतीय नागरिकों की वापसी के लिए मसजिदों और दरगाहों पर दुआएं भी की जा रही हैं। बृहस्पतिवार को कांग्रेस कार्यकर्ता इरशाद उल्ला सहित दूसरे तमाम लोग इलाहाबाद जंक्शन स्थित लाइन शाह बाबा की दरगाह पर पहुंचे। यहां सभी की वापसी के लिए दुआएं की गई। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में तेज कदम उठाए जाने की मांग की है। इस मौके पर डा. मोहम्मद असलम, वीरेंद्र सोनकर, मोहम्मद फैसल, अफसर महमूद, महताब खां आदि मौजूद थे।
उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सैयद मोहम्मद असकरी ने कहा कि लोग इसे शिया और सुन्नी के बीच लड़ाई करार न दें। इराक में इस तरह की कोई चीज नहीं है। सभी मिलकर आतंक का सामना कर रहे हैं। जो संगठन इराक में कत्ले आम कर रहे हैं, उनका मजहब से कोई लेनादेना नहीं है।