इलाहाबाद। विकास भवन में सपा विधायक की दबंगई का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था कि सोमवार को धूमनगंज में सपा विधायक विजमा यादव के भाई रामलोचन यादव के आगे कानून ने फिर से घुटने टेक दिए। धूमनगंज में बिगड़ी कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए घूरपुर से लाए गए एसओ ज्ञानेंद्र सिंह को सोमवार को ज्वाइन करने के छह घंटे के भीतर इसलिए लाइन हाजिर कर दिया गया क्योंकि उन्होंने रामलोचन यादव के करीबी हिस्ट्रीशीटर मड़ियाडीह के प्रधान आबिद को अवैध असलहों के साथ धर लिया था। आबिद को पकड़कर थाने लाने के बाद ज्ञानेंद्र ने कानून की हनक दिखाई तो हफ्ते भर पहले ही बच्चा पासी की हत्या के प्रयास में आरोपी बनाया गया रामलोचन थाने पहुंचा और पूरी व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते हुए उसे शाम को थाने से छुड़ाकर ले गया। हालांकि एसओ को हटाने की एसएसपी मंजिल सैनी ने अलग ही वजह बताई। कहा कि वह सुबह उनसे मिलने आए थे और खुद ही हटने की इच्छा जताई थी। उनका व्यवहार भी कुछ सामान्य नहीं लग रहा था।
‘सिंघम’ के उपनाम से मशहूर ज्ञानेंद्र सिंह ने सोमवार को दिन में 11 बजे ही धूमनगंज थाने का चार्ज लिया था। बताया गया कि अपराधियों की जांच के क्रम में वह मड़ियाडीह चौराहे पर पहुंचे तो वहां प्रधान आबिद दर्जन भर लोगों के साथ बैठा था। धीरे-धीरे सब खिसक गए लेकिन आबिद एक युवक के साथ बैठा रहा। उसके पास दो रायफलें थीं। जब एसओ ने रायफल का लाइसेंस आबिद से दिखाने को कहा तो वह बगलें झांकने लगा। ज्ञानेंद्र ने आबिद और उसके साथ खड़े युवक को धर लिया और थाने ले आए। इसके बाद से ही सपा नेताओं की दबंगई शुरू हो गई। रामलोचन दर्जन भर असलहाधारियों के साथ थाने पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एसओ ने रामलोचन को तुरंत वहां से चले जाने को कहा। दोनों में काफी बहस हुई और रामलोचन देख लेने की धमकी देते हुए चला गया।
करीब आधे घंटे बाद रामलोचन एक दर्जन गाड़ियाें तथा ढाई-तीन सौ लोगों के साथ पहुंचा और थाने को घेर लिया। बाहर असलहाधारी खड़े थे और भीतर एसओ चंद सिपाहियों के साथ। उन्होंने आबिद और उसके साथ पकड़े गए युवक को हवालात में ठूंस दिया और थाने के बाहर ही कुर्सी लगाकर बैठ गए। इसी बीच एसओ के पास फोन पहुंचा और बताया गया कि उनको लाइन में आमद करानी है। फोन किसका था, इसको लेकर चर्चा रही। फोन के बाद भी ज्ञानेंद्र थाने पर ही डटे रहे और बाहर सपा समर्थक। इसी बीच एक दिन पहले खुल्दाबाद भेजे गए इंस्पेक्टर रामसूरत सोनकर मौके पर पहुंचे और रामलोचन को समझा बुझाकर भेज दिया। इसके बाद ज्ञानेंद्र सरकारी जीप में वहां से चले गए। धीरे-धीरे थाने से भीड़ छंटी और आबिद हवालात से बाहर कुर्सी पर आ गया।
ज्ञानेंद्र सिंह ने आबिद को पकड़ने के बाद उसके खिलाफ दूसरे का लाइसेंसी असलहा रखने के मामले में आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया। उनके लाइन हाजिर होने के बाद आबिद और उसके साथी को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया लेकिन दोनों रायफल और उसके लाइसेंस को सीज कर दिया गया। लाइसेंस आबिद के रिश्तेदारों के नाम पर हैं। दोनों रिश्तेदार लाइसेंस लेकर थाने पहुंचे थे। इस मामले की जांच एडिशनल एसपी नीरज पांडेय को सौंपी गई है।
एसएसपी मंजिल सैनी सोमवार के घटनाक्रम के बाद अचानक तीन दिन की छुट्टी पर चली गईं। लोग उनके छुट्टी पर जाने को दिन के घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन एसपी क्राइम एके पांडेय ने कहा कि उनका अवकाश पर जाना पहले से ही तय था।